जयपुर में भाजपा की संगठनात्मक बैठक में राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष ने कहा कि नये लोगों को भी सम्मान मिलना चाहिए। नये लोगों के आने से पार्टी में नयापन आता है। पुराने अनुभव के साथ नया जोश जरूरी है। पार्टी में मोर्चे व प्रकोष्ठ पहली सीढ़ी है। इनको पूरा सम्मान मिलना चाहिए। यदि किसी बात से नाराजगी हो तो उसे पार्टी के प्लेटफार्म पर ही रखें, सार्वजनिक रूप से बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने संगठन के भीतर संयम, संतुलन और आपसी समन्वय बनाए रखने की भी आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि छोटी छोटी बातों पर विवाद से बचना चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। यदि बीएल संतोष के उपरोक्त बयान को लेकर अभी हाल ही में घोषित झुन्झुनू जिला कार्यकारिणी को देखें तो कुछ मुखर व कुछ दबी जुबान से इसका विरोध कर रहे हैं। जो पिछले एक दशक से संगठन के पदों पर कुंडली मारे बैठे थे, उनको यह कार्यकारिणी रास नहीं आ रही और कार्यकारिणी पर अपना ही एकाधिकार मानते हैं। बहुत से आयातित नेता भी कार्यकारिणी को लेकर नाखुश नजर आ रहे हैं। वैसे झुंझुनूं की राजनीति आया राम गया राम की राजनीति के लिए मशहूर है और सत्ता के साथ रहना ही उनके सिध्दांतों में है। पार्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं है, केवल सत्ता के साथ ही रहना उनकी राजनीति में शुमार है तो कभी कांग्रेस के साथ रहे, जिन्होंने कभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला जलाया, जो कभी लोक जन शक्ति पार्टी के सर्वेसर्वा रहे, आज खुद को पुराने भाजपाई बताकर इस कार्यकारिणी को लेकर दबे स्वर से विरोध कर रहे हैं। बीएल संतोष के नये लोगों से यह तात्पर्य नहीं कि आयातित नेताओं को पार्टी में आते ही पदों से नवाजा जाए, उनका यह संदेश है कि युवा पीढ़ी को पार्टी की विचारधारा से जोड़ा जाए। जब युवा चेहरों को संगठन में जगह मिलेगी तो उनके साथ जो युवा वर्ग है, वह स्वत: ही पार्टी से जुड़ेगा और पार्टी ज्यादा मजबूत होगी। आयातित नेताओं की वजह से भाजपा मे गुटबाजी को लेकर शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा। इसी गुटबाजी के चलते विधानसभा चुनावो में भाजपा आशानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई। यदि इस गुटबाजी पर व छपास के रोगी भाजपा नेताओं पर लगाम नहीं लगाई तो आने वाले पंचायत व निगम चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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