जन्मदिन आयोजन की आड़ में शक्ति प्रदर्शन

AYUSH ANTIMA
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जन्मदिन आयोजन की आड़ में शक्ति प्रदर्शन

राजनीतिक नेताओं की असली ताकत उनका जनाधार होता है। इसी जन शक्ति के बलबूते जिले के नेता जीत का वरण करते आए हैं लेकिन जब यह जनशक्ति भीड़ तंत्र का रूप धारण कर लेती है और वह नेता उस भीड़ तंत्र को जन शक्ति मान बैठता है तो चुनावों में उसे आशानुरूप प्रदर्शन उसके पक्ष में नामुमकिन हो जाता है। ज्योंही चुनाव नजदीक आते हैं, नेता विभिन्न आयोजनों के जरिए अपने राजनीतिक आकाओं को शक्ति प्रदर्शन दिखाकर टिकट की दावेदारी प्रस्तुत करते नजर आते हैं। झुन्झुनू जिले की बात करें तो खेलों के आयोजन व धार्मिक आयोजनों की आड़ में शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। चूंकि नगर निकाय चुनाव नजदीक है और ऐसे आयोजनों की आड़ लेकर शायद चैयरमेन की कुर्सी तक पहुंचने की लालसा पाले बैठे हैं परन्तु भीड़ तंत्र को वोटों में तब्दील करने में मशक्कत करने की जरूरत है क्योंकि आधुनिक परिवेश में मतदाता इतना परिपक्व हो गया है कि शारीरिक रूप से दिखता कहीं ओर है व आत्मीय रूप से होता किसी ओर के साथ है। यदि उदयपुरवाटी विधानसभा की बात करें तो भाजपा के एक युवा चेहरे ने अपने जन्मदिन की आड़ में शक्ति प्रदर्शन किया तो शुभकरण चौधरी व रणवीर सिंह गुढ़ा के खेमे में खलबली जरूर मची होगी। शुभकरण चौधरी इस विधानसभा सीट के प्रबल दावेदार में से एक नेता हैं। हालांकि पिछले चुनावों में उनको हार का सामना करना पड़ा था लेकिन राजनेताओं का हार जीत होना, चोली दामन का साथ होता है। किसी नेता की हार होना, इस बात का सूचक नहीं कि वह राजनीतिक पटल से ओझल हो गया है। हार के बावजूद शुभकरण चौधरी को विधानसभा क्षेत्र में एक्टिव देखा जा सकता है। ऐसा नहीं कि चुनावी मौसम में ही शुभकरण चौधरी लोगों के बीच जाते हैं। रणवीर सिंह गुढ़ा की बात करें तो उदयपुरवाटी की जनता के आशीर्वाद से विधानसभा जाने के फिराक में है। रणवीर सिंह गुढ़ा का भाजपा मे आना जिले के एक धड़े को रास नहीं आ रहा, वैसे रणवीर सिंह गुढा संगठन के कार्यक्रमों में स्टेज की शोभा बढाते देखे गये है। भाजपा के एक युवा नेता ने अपने जन्मदिन के आयोजन की आड़ में शक्ति प्रदर्शन कर उदयपुरवाटी विधानसभा क्षेत्र में शंखनाद कर दिया है। अब यह आगामी पंचायत व नगर निकाय चुनावों में भी इन नेताओं का रिपोर्ट कार्ड देखने को मिलेगा कि जनता का आशीर्वाद किस नेता के साथ है। विदित हो झुंझुनूं उपचुनाव को लेकर भी एक नेता ने शक्ति प्रदर्शन किया था लेकिन वह कागजी कतरनों तक ही सिमट कर रह गया था। झुंझुनूं जिले की बात करें तो एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ होती है। यही कारण है कि भाजपा में चुनावों के समय भीतरघात देखने को मिलती है। इसी गुटबाजी ने भाजपा में बिखराव की स्थिति ला रखी है और उसके परिणाम चुनावों में देखने को मिलते हैं। वैसे देखा जाए तो राजनीतिक रूप से परिपक्व होकर अपनी पुरानी राजनीतिक भूलो से सबक लेकर जिले में पवन मावंडिया का राजनीतिक कद बढ़ा है, जिसकी छाप संगठन की घोषित कार्यकारिणी में स्पष्ट दिखाई देती है। सैनी बाहुल्य उदयपुरवाटी विधानसभा में पवन मावंडिया भी ताल ठोक सकते हैं और यदि पवन मावंडिया टिकट की दावेदारी करते हैं तो यह सभी नेताओं से भारी पड़ेंगे क्योंकि प्रदेश नेतृत्व व मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से उनकी नजदिकियों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है

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