भारत आदिकाल से ही तीर्थ यात्राओं के देश के नाम से विख्यात रहा है। यह भी देखा गया है कि इसकी भौगोलिक परिस्थितियों को तय करने में धार्मिक स्थलों का विशेष योगदान रहा है। ऐसा नहीं कि केवल हिन्दू धर्म में ही तीर्थ स्थलों का योगदान है, इसके अलावा अन्य समुदायों के लोग भी बहुतायत से रहते हैं तो उनके धार्मिक स्थलों का भी इसमें योगदान रहा है। यदि हिन्दू धर्म की बात करें तो हर प्रदेश के अंचल हिन्दू तीर्थ स्थलों से भरे पड़े हैं। इन तीर्थ स्थलों पर प्रत्येक वर्ष विशिष्ट धार्मिक अवसरों पर हिन्दू तीर्थ यात्रा पर पुण्य कमाते हैं। पिछले एक दशक से इन तीर्थ स्थलों पर धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। इसका मतलब यह नहीं कि अचानक लोगों की आस्था धर्म व तीर्थ स्थलों की ओर हुई है बल्कि पहले की सरकारों ने इन धार्मिक स्थलों के सर्वांगीण विकास की तरफ ध्यान नहीं दिया। पिछले दो दशकों से इस क्षेत्र में सरकार ने पर्यटन की अपार संभावनाओं के मध्य नजर मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान देना शुरू किया क्योंकि धार्मिक पर्यटन को व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का जरिया माना। इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की ठोस निति बनाई व सांस्कृतिक व पर्यटन मंत्रालय ने हिन्दू धार्मिक स्थलों का प्रबंधन सुधरे इसकी तरफ ध्यान दिया। विदित हो 90 के दशक में देश के विख्यात धार्मिक स्थल वैष्णो देवी की यात्रा सुगम व सुविधाजनक बनाने के लिए यातायात के साधनों मे बढ़ोतरी के साथ ही ट्रस्ट की स्थापना की गई। इस ट्रस्ट में सरकार द्वारा नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। इस ट्रस्ट के निर्माण का एक ही मकसद था कि तीर्थ यात्रियों की यात्रा कम से कम कष्टकारक हो और मंदिर की व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। अपने इस काम में ट्रस्ट पूरी तरह सफल रहा और निश्चित रूप से यात्रियों की तीर्थ यात्रा सुखदायक भी हो गई। मोदी सरकार के आने के बाद धार्मिक स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्र के रूप में भी योजना बनाने के साथ ही काम भी हुआ। बनारस में भगवान विश्वनाथ मंदिर मे कारीडोर का निर्माण व उज्जैन के महाकाल मंदिर में कारीडोर का निर्माण पर्यटन क्षेत्र में बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया व मूलभूत ढांचे जैसे यातायात के साधनों को बढ़ावा देने वाली निति पर काम किया तभी यह स्थान धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नंबर एक बनने की ओर अग्रसर है। इसी संदर्भ में यदि देखें तो राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि डबल इंजन सरकार शेखावाटी को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करें तो वाणिज्यिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ ही स्थानीय लोगो के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। शेखावाटी में विश्व प्रसिद्ध राणी सती मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, सालासर धाम, मां शाकम्बरी मंदिर, मनसा माता मंदिर, लोहार्गल धाम ऐसे धार्मिक स्थल है, जो मूलभूत सुविधाओं से वंचित होने के साथ ही धार्मिक पर्यटन से कोसों दूर है। टूटी फूटी सड़के व मंदिर स्थलों मे तीर्थ यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था के साथ ही दर्शनों की सुचारू व्यवस्था हो। सरकार ने यात्रियों के दबाव को देखते हुए खाटूश्यामजी में एक मास्टर प्लान की घोषणा की थी लेकिन यह कागजी कार्रवाई तक ही सीमित होकर रह गया। अपनी श्रद्धा व विश्वास के साथ लाखों तीर्थयात्री इन स्थानों का दर्शन कर पुण्य के भागी बनते हैं लेकिन टूटी फूटी सड़के व मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार की अनदेखी से दुखी रहते हैं। शेखावाटी की पावन धरा धार्मिक स्थलों, मंदिरों के साथ ही संतो की तपोभूमि भी रही है। यदि राज्य सरकार इसको पर्यटन क्षेत्र घोषित कर आवागमन के साधनों की तरफ ध्यान दें तो निश्चित रूप से शेखावाटी में धार्मिक पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं।
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