रतनगढ़/चुरू (तोलाराम मारू): उपखंड मुख्यालय रतनगढ़ में भारत रत्न एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय के प्रखर पुरोधा कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती शुक्रवार को रतनगढ़ में हर्षोल्लास, श्रद्धा एवं समाजवादी चेतना के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित जयंती समारोह एवं विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर के सादगीपूर्ण जीवन, ईमानदार राजनीति और पिछड़े-वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए ऐतिहासिक निर्णयों को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी हरिप्रसाद हर्षवाल ने की। विचार गोष्ठी ओमप्रकाश चौहान, पार्षद राजेश गहलोत, फकीरचंद दानोदिया, गोविंद प्रसाद बबेरवाल, राजेंद्र नोखवाल, मोहन लाल सैनी, रविंद्र तंवर, नितेश वक्ताओं विचारों की अभिव्यक्ति करते हुए कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने राजनीति को सत्ता नहीं बल्कि सेवा का माध्यम माना और सामाजिक समानता, आरक्षण व्यवस्था तथा गरीब-मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए निर्भीक फैसले लिए। उनका पूरा जीवन संघर्ष, ईमानदारी और सादगी का प्रतीक रहा। अध्यक्षीय संबोधन में हरिप्रसाद हर्षवाल ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने बिना किसी भय के आरक्षण जैसे ऐतिहासिक निर्णय लेकर सामाजिक समानता की नींव मजबूत की। उनका जीवन सच्चे अर्थों में जननेता का उदाहरण है। हमे कर्पूरी ठाकुर के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान उपस्थितजनों ने कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। उपस्थित लोगों ने कहा कि जिस प्रकार अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम अवकाश होता है, वैसे ही राजस्थान सरकार द्वारा भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाये।
इस अवसर पर श्यामसुंदर गहलोत, विजय कुमार भाटी, निरंजन, संतोष बबेरवाल, पंकज हर्षवाल, सुरेश घारू, कुतुबुद्दीन पठान, घासीराम हर्षवाल, अनिल प्रजापत, अशोक आलडिया सहित सैकड़ों कामगार एवं समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का बहुत ही शानदार गजब का सफल संचालन एवं समापन रामावतार रक्षक ने किया।।