अरावली को लेकर राजनीतिक पैंतरेबाज़ी तेज*

AYUSH ANTIMA
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अरावली पहाड़ियों को लेकर 100 मीटर की परिभाषा को लेकर सरकार के रूख के प्रति जनता में आक्रोश है लेकिन इसको लेकर राजनीतिक पैंतरेबाज़ी भी तेज हो गई है। भाजपा कांग्रेस पर आरोप लगा रही है कि वह वेबजह लोगों में भ्रम फैला रही है। अलवर के सांसद और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत के कार्यकाल में इस प्रारूप पर सहमति जताई थी। इसके साथ ही भाजपा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दे रही है, उसकी हकीकत यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ प्लान बनाने के लिए कहा है। जहां तक 100 मीटर की परिभाषा का सवाल है तो इसे पहाड़ी के उपर वाले थोर से जमीन के अंदर तक नापा जायेगा। अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने मान लिया कि 100 मीटर से ज़्यादा ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली की श्रृंखला माना जायेगा। इसको लेकर देश की इलैक्ट्रोनिक मिडिया ने इसके फायदे गिनाने शुरू कर दिये है। यह पत्रकारिता के मूल्यों के पतन की पराकाष्ठा ही है कि एक चैनल ने दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर अरावली की श्रृंखला को दोषी करार दिया है। चैनल के अनुसार दिल्ली अरावली की श्रृंखला से घिरी हुई है, इसलिए यहां प्रदूषण बढ़ रहा है। यदि ऐसा है तो हिमाचल प्रदेश में तो प्रदूषण बहुत ज्यादा होना चाहिए क्योंकि वह तो पहाड़ियों से घिरा हुआ है। देखा जाए तो यदि सरकार आम आदमी की ऊंचाई को लेकर परिभाषित कर दे कि पांच फुट से ज्यादा ऊंचाई वाले को ही मनुष्य की श्रेणी में रखा जायेगा तो यह इलेक्ट्रॉनिक मिडिया इसके फायदों का अंबार लगा देंगे। अरावली की ऊंचाई को परिभाषित करने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री का बयान भी सामने आया है कि जब उनके कार्यकाल में इस परिभाषित ऊंचाई को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया तो अब भाजपा सरकार को इसे दुबारा परिभाषित किसके दबाव में किया है। राजस्थान को लेकर यदि अरावली की उपलब्धता को देखें तो यह मात्र पहाड़ नहीं है, यह राजस्थान की जीवन रेखा है। यदि यह परिभाषा लागू हुई तो राजस्थान जो पानी की किल्लत झेल रहा है, आने वाली पीढी के लिए विकराल रूप धारण कर लेगा। एक तरफ भाजपा एक पेड़ मां के नाम अभियान को लेकर वाहवाही लूट रही है तो दूसरी तरफ अरावली पर्वत श्रृंखला पर असंख्य पेड़ कटने के लिए खनन माफिया के हाथों सुपूर्द कर रही है। पूरे देश में अरावली बचाओ अभियान किसी न किसी मंच के माध्यम से चलाया जा रहा है। इसको लेकर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने अपने लेखों मे लोगो को अरावली के प्रति जवाबदेह होने को लेकर सटीक पत्रकारिता का परिचय दिया है।

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