सामाजिक सरोकार: सात फेरों के साथ किए पाँच सांस्कृतिक नवाचार

AYUSH ANTIMA
By -
0


.................................

......



*पाँच सामाजिक सरोकार और नवाचार*

1. वैदिक रीति रिवाज के साथ संगीतमय फेरे।
2. गौ संवर्धन- गाय के गोबर से बने ईको फ्रेंडली कागज़ से बनाए बीजयुक्त निमंत्रण पत्र। 
3. पर्यावरण संरक्षण- एक पेड़ मां के नाम का आह्वान के साथ पौधा वितरण।
4. स्थानीय एवं स्वदेशी अपनाने का संकल्प।
5. खाद्यान्न सुरक्षा और अन्न के सम्मान का संदेश। 

भारतीय वाङ्मय के अनुसार महीनों में सर्वोत्तम मास मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की पंचमी श्रीराम-जानकी विवाहोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस शुभ तिथि को वैदिक विधि-विधान तथा पंच आधुनिक नवाचारों के साथ जयपुर के कानोता कैंप रिसोर्ट में संपन्न हुआ। एक विवाह इन दिनों प्रदेश में चर्चा और प्रशंसा का विषय बना हुआ है। हिन्दू विवाह को एक पवित्र बंधन और धार्मिक संस्कार माना जाता है। सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत यह विवाह 25 नवंबर 2025 को संपन्न हुआ, जिसमें राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी डॉ.गोरधन लाल शर्मा की सुपुत्री सौभाग्यवती वसुंधरा और राजस्थान हाऊसिंग बोर्ड के सेवानिवृत्त उपायुक्त श्री सिद्धनाथ द्विवेदी के सुपुत्र चिरंजीवी लक्ष्य ने सात फेरों के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े सात संकल्पों को पूरा करने का संदेश भी दिया गया। 

 *वैदिक रीति रिवाज के साथ हुए संगीतमय फेरे*

श्रीराम-जानकी विवाह पंचमी को, दिन के समय, शुभ लग्न में संपन्न हुए इस अनूठे विवाह उत्सव में संगीतमय सप्तपदी के फेरे श्रीधाम वृंदावन के पंडित श्री योगेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न करवाए गए। आचार्य प्रवर द्वारा न केवल पारंपरिक श्लोकों का संगीतमय वाचन किया गया बल्कि संस्कृत भाषा में रचे गए उन विवाह मंत्रों के अर्थ को उन्होंने उपस्थित परिजनों के समक्ष पूर्ण व्याख्या के साथ खोलकर समझाया। सप्तपदी का यह संगीतमय अनुष्ठान कमल सरोवर के निकट, भांति-भांति की पुष्प लताओं से सजे वैदिक मंडप में संपन्न हुआ, जहां वर वधू के परिवारजन उपस्थित रहे।
पेशे से कंप्यूटर इंजीनियर वसुंधरा व अमेरिकन कंपनी में टीम मैनेजर के तौर पर कार्यरत चिरंजीव लक्ष्य के इस विवाह उत्सव की खास बात इस दौरान अपनायी गयी परंपरागत रीति-नीति के साथ-साथ किये गये सामाजिक सरोकार और नवाचार भी हैं।

*गाय के गोबर से बने ईको फ्रेंडली कागज़ से बनाया बीजयुक्त निमंत्रण पत्र*

विवाह के निमंत्रण-पत्र स्वदेशी हैंडमेड, री-साइकिल्ड, इको फ्रेंडली एवं बायोडिग्रेडेबल छपवाए गए थे, जो गो-माता के गोबर से निर्मित कार्ड-बोर्ड के बने थे। यही नहीं, इन कार्डों में तुलसी, गेंदा, जीरा व पालक के बीज भी पिरोये गए। कार्ड के पृष्ठ भाग पर एक संदेश भी अंकित किया गया - "कृपया इस पत्र को छोटे-छोटे टुकड़े करके गमला या जमीन में पानी के साथ डालें, जिससे उपयुक्त मौसम के अनुसार बीज अंकुरित होंगे।" 
इस प्रकार पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ गो-संवर्धन का मैसेज भी इस कार्ड के साथ सभी आमंत्रितों तक पहुंचाया गया। समाज में पर्यावरण चेतना को पैदा करने और हरियाली के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के क्रम में संपन्न इस नवाचार की चर्चा सर्वत्र रही। 

*एक पेड़ मां के नाम का आह्वान के साथ पौधा वितरण*

“एक पेड़ मां के नाम” राष्ट्रीय पर्यावरण अभियान का संदेश भी इस विवाह समारोह में शामिल रहा। कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों को तुलसी समेत कई प्रकार के पौधे गमले सहित वितरित किए गए। वितरण स्थल पर एक प्रेरक पोस्टर लगाया गया-एक पेड़-एक जिंदगी। यहाँ यह उल्लेख करना जरूरी है कि वधू के पिता डॉ.गोरधन लाल शर्मा द्वारा पिछले दो दशकों से अपने सभी निजी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में पौधों का वितरण किया जाता रहा है। 

*स्थानीय उत्पाद: नए भारत की असली ताकत का दिया संदेश*

नवाचारों के इसी क्रम में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने की कवायद भी इस विवाह उत्सव का आकर्षण बना। “स्वदेशी अपनाएं - आत्मनिर्भर भारत बनाएं” संदेश लिखे एक बड़े बैनर के पास राजस्थान के विभिन्न स्थानों के प्रसिद्ध खास स्थानीय व्यंजन परोसे गए। ये सभी व्यंजन अपने विशिष्ट स्वाद और स्थानीय कारीगरी के कारण समूचे भारतवर्ष में पहचाने जाते हैं। सदियों से इनकी रेसिपी की विशेष पहचान रही है। इन 13 प्रकार के स्थानीय व्यंजनों में खासतौर से शामिल रहे- नगर के जलेबा, खेड़ली की बर्फी, गंगापुर के खीर मोहन, अलवर का कलाकंद, प्रतापगढ़ की हींग दाल, खेड़ली वाले हनुमान के दालमोठ नमकीन, दौसा के डोवठा, चिड़ावा के पेड़े, चौमू की बर्फी, पचवारा के हींग के सेव नमकीन, भरतपुर की कुटैमा गजक, जोधपुर की मावा कचोरी तथा श्रीअन्न (मिलेट) के व्यंजन। 
आंचलिक पहचान रखने वाले इन प्रसिद्ध व्यंजनों का आगंतुक अतिथियों ने खूब लुत्फ उठाया और उनके बीच स्वाद की इस विशिष्टता के बहाने किए गए स्वदेशी स्थानीय उत्पादों का प्रचार चर्चा का विषय रहा। यहाँ बैनर पर लिखा हुआ वाक्य ना केवल भारतीयता की भावना पैदा करने वाला था बल्कि विकसित भारत 2047 के संकल्प का सूत्र वाक्य भी है- “स्थानीय उत्पादन - नए भारत की असली ताकत”। 

*खाद्यान्न सुरक्षा और अन्न देवता के सम्मान का सामुदायिक संदेश*

उक्त विवाह संस्कार के दौरान एक अन्य सामाजिक पहल के रूप में प्रदत्त अन्न का सम्मान व खाद्यान्न सुरक्षा का संदेश विशेष तौर पर सराहा गया। वसुंधरा और लक्ष्य के इस विवाह उत्सव में अन्न का सम्मान करने और जूठन न छोड़ने के विचार और खाद्यान्न सुरक्षा का यह संदेश वैदिक भोजन मंत्र के साथ लिखा हुआ था। साथ ही समारोह के पश्चात स्वयंसेवी संस्था 'पाठशाला' के माध्यम से जरूरतमन्दों के लिए बचे हुए भोजन को पैक करवाकर भिजवाया गया। म्यूजिकल फेरे और संगीत संध्या में श्री सोमनाथधाम वृंदावन के भागवताचार्य आचार्य योगेन्द्र शास्त्री के साथ ग्वालियर घराने से जुड़े संगीतज्ञ पंडित संदीप शर्मा और उनकी मंडली के साथ जयपुर के कलाकार अनिल कुमार ने मंगल गीत और प्रेम गीत गाकर संगीत की महफिल को जीवंत बना दिया। कुल मिलाकर इस वैवाहिक कार्यक्रम में चौबे परिवार और द्विवेदी परिवार द्वारा अपनाए गए सामाजिक सरोकारों से युक्त यह विवाह उत्सव सामाजिक सांस्कृतिक, वैदिक एवं धार्मिक अनुष्ठानों के निर्वहन के साथ साथ एक यादगार और अविस्मरणीय समारोह बन गया ।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!