शौर्य दिवस आदेश वापसी पर संयुक्त अभिभावक संघ का तीखा हमला: “सरकार में शिक्षा देने का साहस नहीं बचा, इसलिए दिखावे के शौर्य दिवस मनाने की नौटंकी की गई”

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राजस्थान सरकार द्वारा 6 दिसम्बर को सभी सरकारी स्कूलों में शौर्य दिवस मनाने संबंधी आदेश जारी कर कुछ ही घंटों बाद उसे वापस लेने की घटना ने पूरे राज्य में शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता और सरकार की नीतिगत अस्थिरता पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। संयुक्त अभिभावक संघ ने इस दोहरे रवैए की कड़े शब्दों में निंदा करता है। संघ ने कहा कि "सरकार का यह रवैया साफ दर्शाता है कि राजस्थान सरकार के पास बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने का साहस और इच्छा शक्ति दोनों ही खत्म हो चुकी है। इसलिए पहले पब्लिसिटी के लिए शौर्य दिवस की घोषणा की गई और जब मंत्री का ‘शौर्य’ गायब हुआ तो आदेश वापस लेने में ही अपनी भलाई समझ ली।" प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि क्या सरकार का काम केवल आदेश निकालना और वापस लेना रह गया है, सरकारी शिक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों कर दी गई है। संयुक्त अभिभावक संघ राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से पूछता है कि क्या राजस्थान सरकार गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखने के लिए सरकारी स्कूलों को केवल ‘दिवस मनाने के केंद्र’ बनाना चाहती है। क्या सरकार की प्राथमिकता शिक्षा व्यवस्था है या केवल नौटंकी।

*RTE लागू करने में विफल, निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं और सरकारी स्कूल मौत के गड्ढे बने*

आरटीई के अंतर्गत कमजोर वर्ग के बच्चों को सात माह बीत जाने के बावजूद शिक्षा दिलाने में सरकार पूरी तरह असफल है। निजी स्कूल बिना रोक-टोक मनमानी फीस, एडमिशन और धमकियों से अभिभावकों को प्रताड़ित कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें आए दिन मासूम बच्चों की जान ले रही हैं — पर सरकार को केवल ‘दिवस’ मनाने की चिंता है, सुरक्षा की नहीं। स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर सरकार की खामोशी और लापरवाही सबसे दर्दनाक है। अभिभावक रो रहे हैं, बच्चे दबाव में टूट रहे हैं लेकिन सरकार ‘शौर्य दिवस’ जैसे आदेश जारी कर संवेदनाओं का मज़ाक बना रही है।

*क्या सरकार कभी यह आदेश जारी करेगी कि “हर बच्चे को सुरक्षित, मानसिक रूप से स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का संकल्प”*

संघ स्पष्ट करता है कि शिक्षा नीति एक गंभीर विषय है। इसे राजनीति, पब्लिसिटी, आदेश व वापसी की बेसुरी हरकतों में नहीं बदलना चाहिए। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि “सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर उसकी क्या नीति है। शौर्य दिवस पर आदेश जारी कर वापस लेना सरकार के निर्णयों की अपरिपक्वता और शिक्षा के प्रति असंवेदनशीलता का प्रतीक है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा देना सरकार का कर्तव्य है — ‘दिवस मनाना’ नहीं। हम पूछते हैं — आखिर शिक्षा के नाम पर यह खिलवाड़ कब तक चलेगा”
*संयुक्त अभिभावक संघ मांग करता है कि*

* आरटीई प्रक्रिया के तहत 44060 बच्चों के निजी स्कूलों में दाखिले हो जाने के बावजूद पिछले सात माह से लंबित चल रहे है तत्काल 44060 बच्चों की शिक्षा शुरू करवाई जाए।

* नीरजा मोदी स्कूल सहित 60 से अधिक निजी स्कूलों को आरटीई के तहत नोटिस जारी हुए दो माह हो गए तत्काल उनकी मनमानी पर लगाम लगाई जाए और मान्यता रद्द की जाए।

* सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों की मरम्मत व सुरक्षा ऑडिट तत्काल किया जाए।

* बच्चों की आत्महत्या रोकने के लिए स्कूलों में मनोवैज्ञानिक और काउंसलिंग व्यवस्था अनिवार्य की जाए और बच्चों को स्कूलों में सुरक्षित वातावरण मिले इसके लिए संयुक्त कमेटी का गठन किया जाए और अभिभावक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

* शिक्षा विभाग में आदेश जारी करने से पहले विशेषज्ञों, अभिभावक संगठनों और शिक्षकों से परामर्श अनिवार्य किया जाए।

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