राजस्थान की सियासत में भूचाल लाने वाले वाले स्टिंग ऑपरेशन को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का बयान आया है कि विधायकों द्वारा विधायक निधि से अनुशंसा करने की एवज में कमीशन लेने वाला विडियो कपोल कल्पित है, यह एक नाटक है, जो वास्तविकता से कोसों दूर है। राठौड़ के अनुसार एक कल्पना के माध्यम से विधायकों को फंसाया गया है। कांग्रेस विधायक व निर्दलीय विधायक के साथ हमारे वाला विधायक भी इस नाटक में फंसा है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस नाटक को गंभीर मानेंगे या हकीकत में पैसे लेकर जेल गये है, उसे गंभीर मानेंगे। स्टिंग का मतलब है स्वांग, एक नाटक और कपोल कल्पित आधार पर सौदेबाजी लेकिन इसके बावजूद भी विधायको के आचरण को सही नहीं मानते हैं। मदन राठौड़ का जो विडियो वायरल हो रहा है, उसे देखकर लगता है कि उन्होंने तीनों विधायको को क्लीन चिट दे दी है। विदित हो एक समाचार पत्र में स्टिंग ऑपरेशन की खबर व स्टिंग के विडियो सोशल मीडिया पर उनका विडियो वायरल होने के बाद इस मामले को विधानसभा की सदाचार समिति को जांच के लिए सौंपा था। तीनों विधायको ने प्रथम दृष्टया में अपना पक्ष सदाचार समिति के समक्ष रखा है लेकिन समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस मामले को कपोल कल्पित बताकर सिरे से खारिज कर दिया। समाचार पत्र ने स्टिंग ऑपरेशन में भाजपा विधायक व कांग्रेस विधायक को विधायक निधि से स्कूलों मे दरी पट्टी सप्लाई करने की अनुशंसा करने के एवज में पैसे लेते हुए दिखाया था व निर्दलीय विधायक के पति ने अनुशंसा जारी करने के एवज में कमीशन की बात की थी। अब यदि मदन राठोड़ के बयान का पोस्टमार्टम करें तो उनका बयान कांग्रेस पर आरोप लगाने से मेरी कमीज़ तेरे वाली से सफेद है की तरह प्रतीत होता है। सदाचार समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही विधायकों को क्लीन चिट देना सदाचार समिति पर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। जब क्लीन चिट ही देनी थी तो सदाचार समिति को मामला सौपने का नाटक आखिर क्यों किया। मदन राठौड़ का इस मामले को एक हिन्दी फिल्म की स्क्रिप्ट के रूप में पेश करना और आरोप मुक्त करना इस बात की ओर इशारा है कि खुद ही देव और खुद ही पुजारी बन गये।
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