देश की प्रगति में सुरसा की तरह बढ़ती जनसंख्या बाधक है। जनसंख्या मे यह बढ़ोतरी भोजन, पानी, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी सीमित संसाधनों व बुनियादी ढांचे पर दबाव डालती है। इसके साथ ही गरीबी, बेरोजगारी व पर्यावरण में गिरावट भी बढाती है। किसी देश में संसाधनों की कमी के बावजूद जनसंख्या का तेजी से बढ़ना और उस युवा आबादी को उचित रोजगार और सुविधाओं से न जोड पाना एक सबसे बड़ी चुनौती है और यही चुनौती से भारत जूझ रहा है। लगातार बढ़ती जनसंख्या की वजह से जो चुनौती पेश हो रही है, वह सबसे ज्यादा प्रतिकृति संसाधनों को लेकर है। इस प्राकृतिक संसाधनों में जमीन, पानी, जंगल व खनिज शामिल हैं। जनसंख्या बढ़ने से इन प्राकृतिक संसाधनों के वजूद पर खतरा मंडराने लगता है। इस बढ़ती जनसंख्या से शहरो पर भी काफी दबाव देखा गया है। शहरीकरण के बढ़ने के साथ ही अपराधों में भी वृद्धि देखने को मिली है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट को देखने से पता चलता है कि भारत सर्वाधिक आबादी वाला देश बन गया है। 2026 के आगमन के साथ ही भारत की जनसंख्या का आंकड़ा एक अरब 46 करोड़ 45 लाख के करीब होगा। यदि इस समस्या को लेकर भोजन की समस्याओं को देखते हैं तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है यानी देश की आधी आबादी मुफ्त अनाज के सहारे जीवन यापन कर रही है।
अभी हाल ही में राजनीतिक दल के नेताओं के बयान सामने आये थे कि जब एक विशेष समुदाय बीस पच्चीस बच्चे पैदा करती है तो हिन्दुओं को पांच बच्चे तो पैदा करने ही चाहिए। आखिर वह नेता क्या संदेश देना चाहते हैं यह समझ से परे है। आबादी बढ़ने मे रोहिंग्याओं का भी भारत में प्रवेश को योगदान के रूप में देखा जा रहा है। केन्द्र सरकार इसको लेकर राज्य सरकारों पर दोष मंढती रही है लेकिन देखा जाए तो पिछले एक दशक से केन्द्र की सत्ता पर भाजपा काबिज है व बोर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है, यह रोहिंग्ये उड़कर तो आये नहीं।
सरकार देश को विकसित देश व विश्व गुरू बनाने की बात कर रही है लेकिन 80 करोड़ भुखमरी सहन कर रहे लोग व बेरोजगारी की फौज के साथ विकसित देश व विश्व गुरू बनाने की बात करना मुंगेरी लाल के सपनों की तरह है। सरकारें अपने अपने हिसाब से वोट बैंक की खातिर उनका संरक्षण करती आई है, जिन्होंने जनसंख्या बढ़ाने मे अपनी अहम भूमिका निभाई है।
इस समस्या से निजात पाने के लिए सरकारो को राजनीतिक हानि लाभ से उपर उठकर केवल देश हित की बात सोचनी होगी। वह देश हित की बात यही है कि दो बच्चों का कानून बनाने के साथ ही इसका कड़ाई से पालन करने की जरूरत है। इसमे दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को मताधिकार से वंचित करने के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें सरकारी सुविधाओं से भी वंचित कर दिया जाए।