प्रॉपर्टी सिबिल – संपत्ति विश्वसनीयता सूचकांक: व्यक्तिगत नुकसान से राष्ट्रीय रियल एस्टेट सुधार मिशन तक

AYUSH ANTIMA
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नई दिल्ली: भारत का रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से जिस सबसे गंभीर समस्या से जूझ रहा है, वह है पारदर्शिता की कमी। यही कमी लोगों की जीवनभर की कमाई, सपनों का घर और भरोसे को एक झटके में खत्म कर देती है। इसी व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से अस्तित्व में आया — प्रॉपर्टी सिबिल – संपत्ति विश्वसनीयता सूचकांक।

समस्या: बिना जाँच का भरोसा

आज भी भारत में प्रॉपर्टी खरीदने का निर्णय अक्सर डेटा के बजाय ब्रोकर के भरोसे लिया जाता है।
 • प्रोजेक्ट्स और डेवलपर्स की कोई मानक विश्वसनीयता रेटिंग नहीं।
 • छुपे हुए कानूनी जोखिम और विवादित ज़मीनें।
 • खरीदार की शिकायत का डेवलपर पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं।
रियल एस्टेट वर्षों से वेरिफिकेशन के बिना भरोसे पर चल रहा था।

संस्थापक की कहानी: संकट से संकल्प तक

प्रॉपर्टी सिबिल की नींव किसी कॉन्फ्रेंस रूम में नहीं, बल्कि एक गहरे व्यक्तिगत संकट में पड़ी।

राजस्थान के रियल एस्टेट उद्यमी भुवनेश गुप्ता ने एक गलत प्रॉपर्टी डील के कारण ₹10 करोड़ से अधिक का चलता-फिरता व्यवसाय एक ही दिन में खो दिया। डील में ड्यूल ओनरशिप पेपर्स थे, लेकिन न कोई चेतावनी तंत्र था, न कोई वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म और न ही जवाबदेही की कोई व्यवस्था। इस नुकसान से भी ज़्यादा पीड़ादायक था वह सवाल —
“अगर सिस्टम के अंदर रहने वाले के साथ यह हो सकता है, तो आम खरीदार का क्या होगा ?”

उसी दिन एक संकल्प लिया गया, “जो मेरे साथ हुआ, वो अब किसी और के साथ नहीं होने दूँगा।”

समाधान: प्रॉपर्टी सिबिल – संपत्ति विश्वसनीयता सूचकांक

प्रॉपर्टी सिबिल भारत का पहला प्रॉपर्टी क्रेडिबिलिटी और जोखिम मूल्यांकन मंच बन रहा है, जहाँ:
* प्रोजेक्ट और डेवलपर का मूल्यांकन कानूनी और ज़मीनी तथ्यों पर होता है।
* खरीदार की फीडबैक से डेवलपर की रेटिंग सीधे प्रभावित होती है।
 • निवेश से पहले जोखिम की पहचान की जाती है।
 • पारदर्शिता विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बनती है।

स्पष्ट मंत्र:
“खरीदने से पहले जाँचें, खोने से पहले सुरक्षित करें।”

अब तक की प्रमुख उपलब्धियाँ
 • ₹82 करोड़ से अधिक के संभावित फ्रॉड को रोकने में सहायता।
 • कई विवादित और हाई-रिस्क सोसाइटीज़ की पहचान।
 • खरीदार-आधारित संपत्ति विश्वसनीयता स्कोर सिस्टम की शुरुआत।
 • पैन-इंडिया स्तर पर प्रोजेक्ट वेरिफिकेशन पहल।


भरोसे का चेहरा: सौरव गांगुली

भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को प्रॉपर्टी सिबिल का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है।
अनुशासन, ईमानदारी और भरोसे के प्रतीक सौरव गांगुली इस पहल के माध्यम से रियल एस्टेट में वही विश्वास स्थापित करने का संदेश देते हैं, जो उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई दिशा देकर दिया।


आगे का विज़न

प्रॉपर्टी सिबिल किसी बिल्डर या बैंक के खिलाफ नहीं है।
यह ईमानदार डेवलपर्स, जागरूक खरीदारों और संगठित रियल एस्टेट व्यवस्था के पक्ष में खड़ा एक राष्ट्रीय मंच है।
जिस तरह सिबिल ने लोन सिस्टम को बदला, उसी तरह प्रॉपर्टी सिबिल भारत में प्रॉपर्टी पर भरोसे की परिभाषा बदलने आया है। यह केवल एक स्टार्टअप नहीं, यह रियल एस्टेट सुधार की एक राष्ट्रीय पहल है।

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