राजस्थान की चर्चित एसआई भर्ती 2021 एक बार फिर सुर्खियों में है। हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा भर्ती रद्द किए जाने के लगभग ढाई महीने बाद राज्य सरकार ने खंडपीठ में अपील दायर कर दी है। सरकार ने तर्क दिया है कि पेपर लीक की घटनाएँ पूरे प्रदेश में नहीं फैली थीं, बल्कि सीमित दायरे में थीं। इसलिए पूरे राज्य की भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर देना न्याय संगत नहीं है। सरकार का कहना है कि गड़बड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती थी, परंतु हज़ारों योग्य अभ्यर्थियों की मेहनत को एक साथ खारिज कर देना उचित नहीं। यह परीक्षा न केवल उम्मीदवारों का भविष्य तय करती है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए योग्य मानव संसाधन तैयार करती है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया रद्द करने का निर्णय उन युवाओं पर बड़ा आघात है, जो पूरी ईमानदारी से परीक्षा में शामिल हुए थे। दूसरी ओर, अदालत की एकलपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि लीक और अनियमितताओं ने परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को गहरा धक्का पहुँचाया है। न्यायालय के अनुसार, जब चयन प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में आ जाए तो उसका परिणाम स्वीकार्य नहीं रह जाता। इसलिए पूरी परीक्षा को रद्द करना आवश्यक समझा गया। अब मामला खंडपीठ में है, जहाँ दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अंतिम दिशा तय होगी। यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि विश्वास और विश्वसनीयता का प्रश्न भी है—विश्वास अभ्यर्थियों का, विश्वास समाज का और विश्वास भर्ती संस्थाओं का। राज्य की यह अपील उसी विश्वास को बचाने की कोशिश है, जबकि अदालत का पूर्व निर्णय उस पारदर्शिता को कायम रखने का प्रयास था, जो किसी भी भर्ती की आत्मा होती है। आने वाला फैसला न केवल इस भर्ती का भविष्य तय करेगा बल्कि आने वाली परीक्षाओं की दिशा और सरकारी तंत्र की साख पर भी प्रभाव डालेगा।
*@ रुक्मा पुत्र ऋषि*