पोपाबाई के राज में सभी वस्तुएं एक ही भाव थी। एक रूपये किलो चाहे देशी घी हो, ड्राई फ्रूट्स हो या अन्य कोई खाद्य सामग्री हो। एक बार एक गुरू-चेला पोपाबाई के राज्य से गुजर रहे थे तो चेला बोला गुरूजी इस तरह के राजा के राज्य में रहने का मजा है। गुरूजी के बार बार मना करने पर भी चेला नहीं माना तो गुरूजी बोले मै पड़ोसी राज्य में रूकूंगा, यदि तुम पर कोई संकट आये तो याद कर लेना। चेला मजे से खान-पान करते हुए मौज करने लगा। कुछ समय के अंतराल में वहां एक व्यक्ति को जान से मार दिया तो मामला पोपाबाई तक पहुंचा तो बीच चौराहे मे पोपाबाई की मोजूदगी में हत्या करने वाले व्यक्ति को फांसी की सजा दी गई। फांसी का समय आया, पोपाबाई व राज्य के नागरिक इकठ्ठा हो गये। जिस व्यक्ति को फांसी लगनी थी, वह बहुत ही दुबला पतला था, समस्या आई कि फांसी का फंदा गले में फिट नही बैठ रहा था तो पोपाबाई ने आदेश दिया कि राज्य में ऐसे व्यक्ति को ढूंढ़कर लाओ, जिसकी गर्दन फंदे में फिट आती हो। सिपाही ढूंढते ढूंढते चेले के पास पहुंचे, जिसने खा पीकर अपनी गर्दन पहलवान जैसी कर रखी थी। चेले को फांसी के लिए लाया गया लेकिन राजा कितना भी क्रूर हो अंतिम इच्छा तो वह भी पूछता है। चेले से अंतिम इच्छा पूछी गई तो उसने पास के राज्य में रह रहे अपने गुरूजी से मिलने की इच्छा व्यक्त की। पोपाबाई के आदेश से गुरूजी को लाया गया। गुरूजी देखते ही सारा माजरा समझ गये और चेले के कान में कुछ कहने के बाद दोनों झगड़ा करने लगे कि फांसी पर मैं चढूंगा, चेला बोला मैं चढूंगा, दोनों के झगड़े को देखकर पोपाबाई बोली क्या मामला है, दोनों फांसी पर चढ़ने के लिए क्यों लड़ रहे हो। तब गुरूजी ने कहा कि गृह नक्षत्र यह कहते हैं कि जो व्यक्ति इस समय फांसी से मृत्यु को प्राप्त होगा सीधे स्वर्ग जायेगा। यह सुनकर पोपाबाई बोली फांसी मेरे और मेरे बाप दादा की फांसी पर चढूंगी मैं। उपरोक्त प्रकरण राजस्थान की डबल इंजन सरकार पर फिट बैठता है। कांग्रेस सरकार में हुए पेपर लीक प्रकरण को विधानसभा में खूब भुनाया व सत्ता प्राप्त की। सबसे चर्चित एसआई भर्ती में फर्जीवाड़े को लेकर सरकार ने एक बार खंडपीठ की ओर रूख किया है। राज्य सरकार ने एकल पीठ द्वारा भर्ती रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ खंडपीठ में अपील दायर की है। सरकार का तर्क है कि कुछ व्यक्तियों की संलिप्तता के आधार पर पूरी भर्ती निरस्त करना न्यायसंगत नहीं है। अपील में यह भी जोड़ा गया है कि गलत और सही अभ्यार्थियों की पहचान करने में जांच एजेंसियां सक्षम है। विदित हो एकल पीठ ने 28 अगस्त को इस भर्ती को रद्द करने का आदेश दिया था। हालांकि सरकार ने यह अपील 60 दिन की समय सीमा पार होने के बाद दायर की है और इसको लेकर भी माफी का प्रार्थना पत्र लगाया है। अब यह तो माननीय कोर्ट इसे स्वीकार करता है या नहीं। अब इस भर्ती प्रकिया को रद्द करने को लेकर बात करें तो सरकार के काबीना मंत्री डॉ.किरोड़ी लाल मीणा इस बात को लेकर मुखर होकर इस भर्ती को रद्द करने की मांग कर चुके है। हनुमान बेनीवाल ने तो इसको लेकर आंदोलन किया था। इस प्रतियोगी परीक्षा को लेकर राजेन्द्र राठौड़ आरपीएससी में आमूलचूल परिवर्तन की मांग कर चुके हैं। अब यह तो माननीय कोर्ट ही निर्धारित करेगा कि यह भर्ती रद्द होगी या नहीं लेकिन इसको लेकर भाजपा सरकार ने पोपाबाई के राज की याद दिला दी है।
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