SIR फ़ॉर्म सिर्फ़ वोट का पेपर नहीं बल्कि अधिकार, सुरक्षा और सम्मान की ढाल है: सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): भारत में निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किया गया Special Intensive Revision (SIR) अभियान, एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया नहीं नागरिक अधिकारों की रीढ़ है। ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने देश के मुसलमानों और सभी नागरिकों से एक स्पष्ट, संतुलित और जागरूकता भरा संदेश जारी किया है। “SIR फ़ॉर्म को हल्के में मत लीजिए। इसमें आपकी क़ौम, आपका परिवार और आपकी पीढ़ियों का भविष्य दर्ज होता है।”

*क़ुरआन और संविधान*

क़ुरआन का संदेश: “लोगों के अधिकार कम मत करो।” (अल-आ'राफ़: 85) और भारतीय संविधान कहता है: “सही रिकॉर्ड = सही अधिकार।”
यही दो वाक्य, पूरे SIR अभियान का मूल है। सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी साहब का कहना है: अगर नागरिक अपनी सही जानकारी सरकार तक नहीं पहुंचाते हैं, तो फिर शिकायत का हक़ भी कम हो जाता है।

*मुस्लिम समुदाय ही नहीं, पूरे भारत की कमज़ोर और पिछड़ी जातियों के लिए यह बेहद ज़रूरी*

कई राज्यों में यह पाया गया है कि दलित, पिछड़े वर्ग, आदिवासी और अल्पसंख्यक
ग़लत डेटा की वजह से, सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी साहब ने कहा: जनसंख्या कम दिखा दी जाए, नाम वोटर लिस्ट से कटा मिले, पूरे मोहल्ले में सिर्फ़ दो वोट बचें… तो फैसलों पर असर स्वाभाविक है। यह किसी एक धर्म की नहीं—पूरे भारत की समस्या है।

*SIR फ़ॉर्म क्यों इतना महत्वपूर्ण*

* नाम ग़लत हो तो सुधार।

* 18+ युवाओं का नया रजिस्ट्रेशन।

* हर परिवार का सही रिकॉर्ड।

* ग़ैर-हाज़िर मतदाताओं की पुन: प्रविष्टि।

* पता बदलने पर सही एंट्री।

* मृतक सदस्यों की हटाई।

* क्षेत्र की वास्तविक जनसंख्या का सही आँकड़ा।

*फ़ॉर्म न भरने का सबसे बड़ा नुकसान*

सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने स्पष्ट कहा: नाम कटने का मतलब है… आपकी मौजूदगी सरकार की नज़र से ग़ायब हो जाना।

*इससे क्या होता है*

* योजनाएँ नहीं मिलेंगी।

* छात्रवृत्ति और स्कॉलरशिप पर असर।

* जनसंख्या के आंकड़े कम दिखेंगे।

* प्रतिनिधित्व और राजनीतिक वज़न कम।

* सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम कमज़ोर।
“कोई क़ौम हथियारों से नहीं—
ग़लत डेटा से कमज़ोर होती है।”

*सभी भारतीयों से विशेष अपील*

सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने सभी नागरिकों—मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई, दलित, ओबीसी, आदिवासी आदि सबसे कहा:
SIR फ़ॉर्म भरना किसी धर्म की राजनीति नहीं, यह देश के हर व्यक्ति का मूल अधिकार है। अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करें। अपने नाम, पता, उम्र की सही जानकारी दर्ज कराएं। मज़बूत लोकतंत्र का पहला क़दम — सही मतदाता सूची।

*अंतिम संदेश*

हमारी कमज़ोरी हमारी ख़ामोशी है और हमारी ताक़त हमारा सही दस्तावेज़। फ़ॉर्म भरें, अधिकार बचाएं और अपने देश व संविधान को मज़बूत करें।

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