झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) अभियान में लगातार बढ़ती कार्य-प्रगति की मांग, व्हाट्सऐप ग्रुप पर जारी चेतावनी संदेशों और नोटिसों से नाराज होकर झुंझुनूं व मंडावा क्षेत्र के 200 से अधिक बीएलओ और बी-सुपरवाइजरों ने शनिवार को काम बंद कर कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। सुबह 9 बजे शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में कर्मचारियों ने प्रशासन पर अव्यावहारिक टारगेट थोपने और मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। बीएलओ का कहना था कि अभियान शुरू होने पर प्रतिदिन 50 फॉर्म अपलोड करने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे शुक्रवार शाम बढ़ाकर 100 किया गया और देर रात लगभग सवा 9 बजे नया आदेश जारी कर टारगेट 150 फॉर्म प्रतिदिन कर दिया गया। कर्मचारियों ने कहा कि यह लक्ष्य जमीनी परिस्थितियों में पूरा करना संभव नहीं है। विरोध का बड़ा कारण शुक्रवार रात सुपरवाइजर इलेक्शन व्हाट्सऐप ग्रुप पर जारी एक संदेश था, जिसमें लिखा गया, आज कोई भी बीएलओ का अचीवमेंट 100 प्रतिशत से कम रहा तो उस पर ERO/AERO के तहत कार्रवाई होगी। इस संदेश के बाद कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। उधर, मंडावा में इस संबंध में 134 बीएलओ को नोटिस जारी किए गए, जिनमें लक्ष्य पूरे न होने को “घोर लापरवाही” बताया गया। बीएलओ का कहना है कि दिनभर फील्ड में कड़ी मेहनत के बाद उनके कार्य को “घोर लापरवाही” कहना अपमानजनक है। धरने में शामिल बीएलओ कर्मवीर पूनिया ने बताया कि उन्हें मौखिक आदेश दिया गया कि पूरा काम 21 नवंबर तक समाप्त करें, जबकि इसकी अंतिम तिथि 4 दिसंबर है। कई बीएलओ को गणना प्रपत्र चार दिन की देरी से मिले। कई स्थानों पर मतदाताओं के फोटो उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अधिकारी बिना फोटो फॉर्म अपलोड कराने का दबाव बना रहे हैं, जो नियमों के विपरीत है। कुछ कर्मचारियों को अपनी जेब से फोटो खिंचवाकर जोड़ने पड़ रहे हैं। इसी बीच एक बीएलओ ने ग्रुप में अपनी कठिनाई बताते हुए लिखा कि उसके क्षेत्र में 18,000 से अधिक वोट हैं और उसे दिनभर में गुढ़ा, बाकरा, रीको और पुलिस लाइन जैसे प्रमुख चार रेलवे फाटक कई बार पार करने पड़ते हैं, जिससे समय बर्बाद होता है। अपलोडिंग ऐप के हैंग होने से परेशानी और बढ़ जाती है। उसने लिखा इतना टारगेट असंभव है, पता नहीं 4 दिसंबर तक जिंदा रहूंगा या नहीं। झुंझुनूं की रोड नंबर 3 सबसे खतरनाक रोड है। जैसे ही प्रशासन को जानकारी मिली, SDM कौशल्या बिश्नोई और तहसीलदार महेंद्र मूंड मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठे कर्मचारियों से बातचीत की। कर्मचारियों ने कहा कि वे अभियान का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि केवल उचित टारगेट, निर्धारित समयसीमा और अनुचित नोटिसों पर रोक की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार मीटिंग, रात में संदेश, फोन कॉल और कार्रवाई की धमकियां उनकी मानसिक स्थिति पर भारी पड़ रही हैं। इसके बाद सभी कर्मचारियों को जिला परिषद सभागार बुलाया गया, जहां अधिकारियों ने उनकी समस्याएं सुनीं और आवश्यक समायोजन करने का आश्वासन दिया। बातचीत के बाद बीएलओ और सुपरवाइजर दोबारा काम पर लौट गए।
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