बिहार विधानसभा चुनाव व अंता उपचुनाव

AYUSH ANTIMA
By -
0


बिहार चुनावों में विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया और एनडीए को ऐतिहासिक जीत दर्ज होती दिखाई दे रही है। वोट चोर गद्दी छोड़ का विधवा विलाप औंधे मुंह गिर गया। देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल अपने अपरिपक्व नेतृत्व के बोझ के नीचे दबकर दम तोड़ता नजर आ रहा है। इसी क्रम मे लालू परिवार भी अपनी साख नहीं बचा पाया है। जनता के जनादेश को सभी दलों को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए, यही हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था की पहचान रही है। राजस्थान में अंता विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया ने जीत दर्ज कर अपना वर्चस्व बरकरार रखते हुए हार का बदला ब्याज सहित ले लिया है। निर्दलीय नरेश मीणा की आंखों के आगे से शायद जातिवाद का चश्मा उतर गया होगा। यदि नरेश मीणा यह कहे कि अंता में भ्रष्टाचार की जीत हुई है तो यह अंता के जनमानस का अपमान है, जिन्होंने भाया को जिताया है। हनुमान बेनीवाल व राजेन्द्र गुढ़ा भी गोविंद सिंह डोटासरा के गमछे के लपेटे में आ गए। बिहार में यदि अंतिम परिणामों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आती है तो यह व्यक्तिगत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीत है। बिहार की जनता ने नरेंद्र मोदी के वादों पर मोहर लगाकर विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया। अब यदि बिहार विधानसभा चुनाव व अंता विधानसभा उपचुनाव के परिणाम को राजस्थान के दो नेताओं के राजनीतिक भविष्य का निर्णय के बारे में चर्चा करें तो बिहार विधानसभा में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री, जो बिहार में कांग्रेस के सिनियर आब्जर्वर की हैसियत से चुनाव प्रचार कर रहे थे, कांग्रेस को दहाई के अंकों तक न पहुंचना अशोक गहलोत के राजनीतिक भविष्य पर कोहरे के रूप में देखा जा सकता है। अंता में भी अशोक गहलोत के हताशा भरे बयान ने चुनाव परिणामों से पहले ही हार मान ली थी लेकिन यह प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का जलवा ही कहा जायेगा कि भाया को ऐतिहासिक जीत मिली। गहलोत का जलवा खत्म हो चुका है, अब उनको आडवाणी की तरह सलाहकार मंडल की शोभा बढ़ाने के साथ ही युवा चेहरे को मौका देना चाहिए। भाजपा के सुमन की हार को देखें तो यह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खेमे के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता है। सुमन को टिकट दिलवाने में वसुंधरा राजे का ही योगदान रहा है व वसुंधरा राजे अपनी पूरी टीम के साथ अंता चुनाव मे अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद सुमन को जीत नहीं दिला पाई। वैसे भी भाजपा शीर्ष नेतृत्व व वसुंधरा राजे के बीच राजनयिक गतिरोध है और अंता विधानसभा चुनाव परिणाम ने वसुंधरा राजे के राजनीतिक भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह लगाने में अहम भूमिका निभाई है। बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम से स्पष्ट प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जलवा बरकरार है और यह चुनाव परिणाम 2029 की पटकथा के संकेत है। वसुंधरा राजे इस राजनीतिक घाटे की भरपाई कैसे कर पायेगी, यह समय की गर्त में छिपा हुआ है।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!