आखिर विप्र कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन कब

AYUSH ANTIMA
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भजन लाल शर्मा की डबल इंजन सरकार के गठन होने से विप्र समाज में हर्ष की लहर थी। करीब दो साल के अंतराल के बाद भजन लाल शर्मा की कार्यशैली को लेकर विप्र समाज मे आक्रोश व हताशा का माहौल है। विदित हो अपने वादे के अनुसार गहलोत सरकार ने विप्र कल्याण बोर्ड का गठन किया था लेकिन सरकार बदलते ही यह परिपाटी है कि बोर्ड‌ स्वत: ही निष्क्रिय हो जाता है। भजन लाल शर्मा सरकार ने करीब सभी जातियों के कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया लेकिन विप्र कल्याण बोर्ड का गठन अभी तक नहीं करना उनकी विप्र समाज के प्रति बेरुखी का प्रदर्शन है। विप्र समाज जनसंघ के समय से ही भाजपा का कोर बैंक रहा है। गहलोत सरकार ने विप्र कल्याण बोर्ड का गठन कर 100 करोड़ रूपये की राशि इस बोर्ड को बजट भी आवंटित किया था लेकिन उस पर राजनितिक व्यक्ति के मनोनयन से यह बोर्ड कागजों से बाहर ही नहीं निकल पाया। विप्र समाज के कल्याण का ऐसा कोई कार्य धरातल पर नहीं दिखाई दिया, जिससे प्रतीत हो कि विप्र समाज के कल्याणार्थ यह बोर्ड काम कर रहा है। अखिल भारतीय ब्राह्मण परिषद (रजि) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने पुरजोर अपील की है कि विप्र कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन कर इसकी कमान ऐसे महानुभाव को सौंपी जाए, जो विप्र समाज के लिए पूर्ण रूप से समर्पित हो। इसके साथ ही विप्र समाज के संगठनों के पदाधिकारियों से भी अपील है कि हर स्तर पर विप्र कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन की मांग उठाए, जिससे इस बहरी सरकार के कानों तक आवाज पहुंचे। भजन लाल शर्मा का विप्र कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन में देरी को लेकर विप्र समाज मे आक्रोश व हताशा का माहौल है। इसके साथ ही एक ही ज्वलंत प्रश्न है कि जब प्रायः सभी समाजों के कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन हो चुका तो विप्र कल्याण बोर्ड का गठन आखिर कब होगा।

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