सिद्दार्थ महाजन की वापसी से प्रदेश की अफ़सरशाही के तापमान में अचानक इजाफा

AYUSH ANTIMA
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राजस्थान की अफसरशाही में एक खबर ने अचानक तापमान बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार ने 2003 बैच के तेज-तर्रार आईएएस अधिकारी सिद्धार्थ महाजन को उनकी निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही राज्य में वापस भेज दिया है। यह ‘प्रीमैच्योर रिपैट्रिएशन’ सिर्फ एक औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में बड़े बदलाव की भूमिका मानी जा रही है। आमतौर पर किसी अधिकारी को केंद्र से समय पूर्व लौटाने के पीछे कोई असाधारण आवश्यकता या संवेदनशील नियुक्ति की तैयारी होती है। यही वजह है कि सचिवालय से लेकर सीएमओ तक चर्चा का माहौल गर्म हो गया है। राजस्थान में लंबे समय से जिस मुद्दे पर फुसफुसाहट चल रही थी कि मुख्यमंत्री कार्यालय अपनी टीम को फिर से मजबूत करने जा रहा है, उस अटकल को इस कदम ने नया ईंधन दे दिया है। महाजन का अनुभव, केंद्र में उनकी पकड़ और नीति-कार्यान्वयन में उनकी दक्षता उन्हें सीएमओ की किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का नैचुरल दावेदार बनाती है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय को इन दिनों ऐसे अधिकारी की जरूरत है, जो प्रशासनिक फैसलों को रफ्तार दे सके और राजनीतिक-संवेदनशील नीतिगत कार्यवाहियों में तालमेल बना सके। ऐसे में महाजन की अचानक वापसी को एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सचिवालय के भीतर भी यही चर्चा है कि यह वापसी साधारण नहीं है। कई वरिष्ठ अधिकारी मान रहे हैं कि महाजन की हो सकने वाली नई पोस्टिंग आने वाले महीनों में प्रशासनिक ढांचे का रुख बदल सकती है। केंद्र से समय पूर्व लौटाए जाना अपने आप में संदेश होता है और इस बार संदेश साफ है कि राजस्थान सरकार अपने शीर्ष प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने जा रही है। यहाँ तक चर्चा है कि जैसे ही राज्य सरकार नियुक्ति आदेश जारी करेगी, मुख्यमंत्री कार्यालय में “नई पॉवर-सर्किट” की शुरुआत दिखाई देगी। हालाँकि अभी तक राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन माहौल यह पूरी तरह संकेत दे रहा है कि महाजन की वापसी सिर्फ वापसी नहीं, किसी बड़ी तैनाती का प्राक्कथन है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि राज्य सरकार अगला कदम क्या उठाती है। क्या सिद्धार्थ महाजन सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय का अहम हिस्सा बनते हैं, क्या यह प्रशासनिक मजबूती का संकेत है या सत्ता-समीकरणों की कोई नई बुनावट। राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में आज यही सवाल गूंज रहा है कि क्या यह सिर्फ एक वापसी है या बड़े बदलाव की शुरुआत। चर्चा यह भी है कि महाजन को वित्त विभाग में भी नियुक्ति दी जा सकती है।

*महेश झालानी, वरिष्ठ पत्रकार*

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