काठमांडू (श्रीराम इंदौरिया): भारत–नेपाल के गौरव को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने वाले अंतर्राष्ट्रीय समरसता मंच एवं इंडो–नेपाल समरसता ऑर्गनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में नेपाल की राजधानी काठमांडू में नेपाल सरकार की आधिकारिक उपस्थिति में विश्व शांति समरसता सम्मेलन का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन 28 एवं 29 दिसम्बर को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती महोत्सव के समापन अवसर पर आयोजित किया जाएगा। मंच के संयोजक एवं नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति के विशिष्ट सलाहकार एडवोकेट कुलदीप प्रसाद शर्मा ने बताया कि विश्व रत्न स्व.महावीर प्रसाद टोरड़ी द्वारा प्रारंभ की गई वैश्विक समरसता यात्रा को नई ऊँचाइयाँ देने में मंच के प्रेरक सदस्यों ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। नेपाल राष्ट्र के जगतगुरु शिव शक्ति बाबा ने इस आयोजन को भारत–नेपाल की वैदिक सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने का सशक्त प्रयास बताया। मंच के प्रेरणा स्रोत प्रसिद्ध विधिवेत्ता डॉ.हुकुम चंद गणेशिया ने बताया कि नेपाल सरकार के प्रथम उपराष्ट्रपति न्यायमूर्ति परमानंद झा भारत की 51 विशिष्ट प्रतिभाओं को एशिया कॉन्टिनेंट अवॉर्ड से सम्मानित करेंगे।
*सम्मानित प्रतिभाओं में शामिल हैं*
सत्येन्द्र पन्नू (पंजाब), डॉ.धर्मपाल ज्योतिषी (जयपुर), हवा सिंह आर्य (चुरू), सुमन विजयवर्गीय (जयपुर), हरनेक सिंह (पंजाब), बीना कुमारी (जयपुर), आशा डामोर (डूंगरपुर), गोपेश शर्मा (उदयपुर), श्री 1008 रामनाथ जी महाराज (सिरोही), जसप्रित कौर छीना (पंजाब), डॉ.एसके सरकार (अलवर), डॉ.बिजोली सरकार (अलवर), सवेन्द्रजीत सिंह (ब्यावर), शांति नाथ जोशी (बीकानेर), डॉ.भूदत्त शर्मा (उ.प्र.), डॉ.तुहिना प्रकाश शर्मा (अजमेर), रूप सिंह (ब्यावर), एम. देवराज जैन (चेन्नई), गुलाब सिंह भाटी (फलौदी), रमेश चंद्र नागर (कोटा), सुरेश पूनिया (झुंझुनूं), शिवशंकर जोशी (छत्तीसगढ़), बंशीधर रूंडला (जयपुर), वैद्य श्याम सुंदर पारीक (झुंझुनूं), हरजीत मिगलानी (श्रीगंगानगर), राधेश्याम बत्रा (अनूपगढ़), बलोदा राकेश कुमार (सीकर), रामचंद्र यादव (जयपुर), डॉ.राजेंद्र बाबूलाल दुग्गड़ (महाराष्ट्र), डॉ.अनिल शर्मा (झुंझुनूं)।
समारोह रूसी दूतावास के अधीनस्थ रूसी कल्चर सेंटर में आयोजित होगा, जिसमें 25 राष्ट्रों के राष्ट्रीय ध्वजों का नागरिक अभिनंदन समारोह भी शामिल रहेगा। कार्यक्रम संयोजक युवराज आचार्य के अनुसार सभी प्रतिभागियों को परंपरागत रूप से पीले चावल देकर आमंत्रित किया जाएगा। आयोजन वसुधैव कुटुम्बकम्, ग्लोबल विलेज, सत्यम् शिवम् सुन्दरम् की अवधारणा पर आधारित है और भारत–नेपाल संबंधों में नई समरसता एवं सौहार्द स्थापित करने की दिशा में यह कार्यक्रम ऐतिहासिक साबित होगा।