निवाई (लालचंद सैनी): राजकीय उप जिला अस्पताल में सोमवार की सुबह एक चिकित्सक व रोगी के परिजनों के बीच हाथापाई हो जाने पर चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने कार्य का बहिष्कार कर दिया, जिससे अस्पताल में आने रोगियों को परेशानी का सामना करना पडा। अभद्र व्यवहार से नाराज चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ निवाई थाने पहुंचकर राजकार्य में बाधा पहुंचाने व हाथापाई करने के लिए लिखित में रिपोर्ट दी। दूसरे पक्ष की ओर से भी चिकित्सक अरुण लवासिया के विरुद्ध ड्यूटी टाइम में उपचार के लिए 1050 रुपए मांगने और जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने की रिपोर्ट सौंपी। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया और दोनों पक्षों ने ही रिपोर्ट वापस ले ली। पुलिस ने बताया कि सोमवार को सुबह यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव आलोक मीणा की बच्ची के घर पर चोट लग गई। इस पर आलोक मीणा अपने साथी मुकेश मीणा को साथ में लेकर बेटी को अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में पहुंचे। जहां डॉ.अरुण लवासिया व कम्पाउंडर दुर्गालाल मीणा ने घायल बच्ची पर कोई ध्यान नहीं दिया और मोबाइल पर बातचीत करते रहे। जिस पर आलोक मीणा व चिकित्सक के बीच कहासुनी हो गई और दोनों के बीच हाथापाई व धक्का मुक्की हो गई। जिसके बाद आलोक मीणा अपनी बेटी को उपचार के लिए जयपुर लेकर चले गए और चिकित्सकों ने कार्य का बहिष्कार करके थाने पहुंच गए। मामले को लेकर अस्पताल में सैंकडों मरीज उपचार के लिए भटकते रहे। घटना के बाद करीब ढाई बजे विधायक रामसहाय वर्मा भी अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने चिकित्सकों से घटना की जानकारी ली तथा जनहित को देखते हुए पुन: काम पर लौटने की सलाह दी। जिसके बाद सभी चिकित्सकों ने अस्पताल में पुन: चिकित्सा कार्य शुरू कर दिया। आलोक मीणा का कहना है कि इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. अरुण कुमार व कम्पाउंडर दुर्गालाल मीणा रोगियों को नहीं देख रहे थे और फोन पर बातें कर रहे थे। जिनसे बेटी के उपचार की रिक्वेस्ट की लेकिन उन्होंने उपचार के लिए 1050 रुपए मांगे तो मैनें उन्हें सरकारी अस्पताल में रुपए नहीं लगने की बात कही तो वह नाराज हो गए और मुझ पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज करवाने की धमकी दी। इसके बाद मैं बेटी को लेकर जयपुर चला गया। उक्त मामले में डॉ.अरुण कुमार का कहना है कि वह सोमवार को नर्सिंग ऑफिसर दुर्गालाल मीणा के साथ इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात था। इसी दौरान आलोक मीणा अपनी बेटी को लेकर इमरजेंसी कक्ष में आए। उस बच्ची की दाढी के नीचे चोट लगी हुई थी और खून बह रहा था। जांच करने पर एक टांका लगना था। इसी दौरान नर्सिंग ऑफिसर दुर्गालाल टांका लगाने से पहले बच्ची के सुन्न करने का इंजेक्शन लगाने लगे, तो बच्ची जोर से रोने लगी। इस पर आलोक मीणा आक्रोशित हो गए और गाली गलौच कर गिरबान पकड ली तथा हाथापाई कर अभद्रता की। जिसकी सूचना पीएमओ और समस्त स्टाफ को दी। इस मामले को लेकर चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ ने अपनी सुरक्षा को लेकर निवाई थाने में जाकर लिखित रिपोर्ट दी। पुलिस ने बताया कि बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया और दोनों पक्षों ने ही रिपोर्ट वापस ले ली है।
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