लो जी, एग्जिट पोल ने बना दी एनडीए सरकार

AYUSH ANTIMA
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल नतीजों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर लगभग साफ कर दी है। आंकड़ों के अनुसार, एनडीए को 243 में से करीब 154 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन को 83 सीटों पर सीमित बताया गया है। यह आंकड़ा न केवल एनडीए की स्पष्ट बढ़त को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि बिहार की जनता ने एक बार फिर स्थिरता और अनुभव को प्राथमिकता दी है।
बिहार में मतदाता हमेशा से ही जातीय और सामाजिक समीकरणों से प्रभावित होते रहे हैं। इस बार भी एनडीए ने अपने परंपरागत वोट बैंक को एकजुट रखा। भाजपा और जद(यू) के बीच गठबंधन ने ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ बनाए रखी। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और नीतीश कुमार की प्रशासनिक छवि ने एनडीए को दोहरी बढ़त दी। वहीं, महागठबंधन का जन सुराज नारा और तेजस्वी यादव की युवा छवि मतदाताओं को अपेक्षित रूप से आकर्षित नहीं कर सकी। प्रशांत किशोर की रणनीतिक सलाह और जनता के बीच नया बिहार का संदेश भी असरदार नहीं दिखा। इन परिणामों से यह स्पष्ट है कि बिहार की जनता ने इस बार परिवर्तन नहीं, भरोसे को चुना है। लोगों ने यह संदेश दिया है कि उन्हें स्थिर शासन चाहिए, न कि प्रयोगात्मक राजनीति। नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल में अनेक आलोचनाएँ रहीं, परंतु एग्जिट पोल यह दर्शाते हैं कि मतदाता अब भी उन्हें एक अनुभवी और संतुलित नेता के रूप में देखते हैं।
हालाँकि सवाल अब भी बना हुआ है। मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यदि जद (यू) की सीटें भाजपा के बराबर या उसके आसपास रहीं, तो नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावना मजबूत है। परंतु अगर भाजपा अपेक्षा से अधिक सीटें ले आती है, तो सत्ता संतुलन बदल सकता है और मुख्यमंत्री पद को लेकर नया समीकरण सामने आ सकता है। राजनीतिक दृष्टि से यह परिणाम न केवल एनडीए की जीत का संकेत है, बल्कि विपक्ष के लिए आत्ममंथन का अवसर भी है। महागठबंधन ने मुद्दों को तो उठाया, पर जनता से भावनात्मक जुड़ाव नहीं बना पाया। जन सुराज जैसे अभियान का प्रभाव सीमित रहा और वोटों में तब्दील नहीं हो सका। कुल मिलाकर, एग्जिट पोल यह कह रहे हैं कि बिहार की जनता ने विकास, स्थिरता और भरोसे की राजनीति को प्राथमिकता दी है। सरकार एनडीए की बनने के संकेत स्पष्ट हैं, पर मुख्यमंत्री की कुर्सी का फैसला अंतिम सीटों के आंकड़े तय करेंगे। यह चुनाव एक बार फिर साबित कर रहा है कि बिहार में सत्ता के समीकरण बदल सकते हैं, पर नीतीश कुमार अब भी राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं ।

*@ रुक्मा पुत्र ऋषि*

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