काठमाण्डौ/जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): भारत–नेपाल मैत्री संबंधों को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच के मुख्य सलाहकार एवं ईस्ट–वेस्ट लॉ फर्म, काठमाण्डौ के प्रमुख अधिवक्ता डॉ.कुलदीप प्रसाद शर्मा को नेपाल सरकार के प्रथम उपराष्ट्रपति न्यायमूर्ति परमानन्द झा का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया है। उपराष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी सूचना में स्पष्ट किया गया कि यह नियुक्ति राजनीतिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करने के लिए की गई है। काठमाण्डौ स्थित अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच के संयोजक सुभाष सेठी ने बताया कि यह नियुक्ति भारत–नेपाल संबंधों में आए तनाव की पृष्ठभूमि में अत्यंत अहम मानी जा रही है। जैन जी आंदोलन के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई कड़वाहट को दूर कर द्विपक्षीय विश्वास बढ़ाने के लिए डॉ.शर्मा की भूमिका महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। इस तरह की विशेष नियुक्ति उपराष्ट्रपति द्वारा दूसरी बार की गई है। इससे पूर्व विश्व रत्न स्व.महावीर प्रसाद टोरड़ी इस पद पर आसीन थे। अब उनके पुत्र डॉ.शर्मा को उसी विरासत को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ.कुलदीप शर्मा लंबे समय से भारत–नेपाल की वैदिक संस्कृति, सभ्यता और प्राचीन संबंधों को पुनर्जीवित करने की वैश्विक कार्ययोजना पर कार्य कर रहे हैं। उनकी योजना में भारत को पुनः वैदिक कालीन जगतगुरु की भूमिका पर स्थापित करना, भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पावर के साथ स्थाई सदस्यता दिलाने की दिशा में अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना तथा अयोध्या को संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय बनाने जैसी महत्वाकांक्षी पहलें शामिल हैं।
इन्हीं वैश्विक दृष्टिकोणों और 25 से अधिक देशों में नेपाल की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले उनके योगदान को देखते हुए उपराष्ट्रपति कार्यालय के बोर्ड सदस्यों ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगाई। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री लोकेन्द्र बहादूर चंद ने इस नियुक्ति को दोनों देशों के बीच संबंधों को नया आयाम देने वाली ऐतिहासिक पहल बताया। वहीं, नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के राजदूत डॉ.शंकर शर्मा ने डॉ.कुलदीप शर्मा को विशेष सलाहकार नियुक्त होने पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि इससे भारत–नेपाल मैत्री और अधिक प्रगाढ़ होगी। डॉ.कुलदीप प्रसाद शर्मा की यह नई जिम्मेदारी न केवल नेपाल के प्रथम उपराष्ट्रपति कार्यालय की प्रभावशीलता बढ़ाएगी, बल्कि भारत–नेपाल की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कूटनीतिक एकता की राह को भी और अधिक सशक्त बनाएगी।