जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): कल आयोजित विशाल सद्भाव कार्यक्रम में, ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन के चेयरमैन व चीफ़ क़ाज़ी, मुहाफ़िज़े नामूसे रिसालत, पीरे तरीक़त, हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफ़ुल्लाह क़ादरी साहब ने कुरआन व हदीस की रोशनी में अमन, इंसाफ़ और इंसानियत का पैग़ाम पेश किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम का रास्ता न्याय, करुणा, सद्भाव और उच्च चरित्र का रास्ता है। क़ुरआन, हर इंसान के लिए, हिदायत और रहमत है। सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी साहब ने क़ुरआन का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह ने इंसानों को एक ही जान से पैदा किया। अंतर सिर्फ पहचान के लिए हैं, श्रेष्ठता का मापदंड सिर्फ ‘तक़्वा’ है। उन्होंने कहा कि यह आयत पूरी मानवता को इंसाफ़, विनम्रता, संयम और परस्पर सम्मान की शिक्षा देती है। हदीस शरीफ़ का हवाला देते हुए सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी साहब ने कहा कि सबसे अफ़ज़ल इंसान वह है, जो अल्लाह की मख़लूक़ के लिए सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद हो। उन्होंने आगे कहा कि नैतिकता, सदाचार और सामाजिक ज़िम्मेदारी, इसी पर उम्मत की कामयाबी टिकी है। मख़लूक़ के साथ नर्मी और भलाई ईमान की खूबसूरती है। अच्छा चरित्र ही, दावते इस्लाम का, सबसे बड़ा माध्यम है। सदाचार से ही दिल जीते जाते हैं।
*सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी साहब की संतुलित, नपी-तुली अपील*
हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है। विभिन्न समुदायों का आपसी सम्मान, राष्ट्र की मज़बूती का आधार है। अमन, आपसी सद्भाव, क़ानून का पालन और उच्च चरित्र, इसी में हम सबकी भलाई है। इस्लाम, इंसान को सोचने, समझने और समाज के लिए उपयोगी बनने की शिक्षा देता है।
*अंत में की गई दुआ*
अल्लाह तआला हमारे देश में अमन, सलामती और इंसाफ़ क़ायम रखे। दिलों में मोहब्बत, रहमत और ख़ुलूस पैदा फ़रमाए। बुराई, नफ़रत और फ़साद से हमारी हिफाज़त फ़रमाए। आमीन सुम्मा आमीन।