जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): संयुक्त अभिभावक संघ ने राजधानी जयपुर में हुए एक बेहद दर्दनाक और संवेदनशील घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है, जिसमें कालवाड़ के धर्मपुरा निवासी एक बीएलओ ने निरंतर मानसिक प्रताड़ना, असहनीय कार्यभार और सस्पेंड करने की धमकियों से टूटकर ट्रेन के आगे छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में अधिकारी द्वारा लगातार दबाव, अमानवीय व्यवहार और तनाव का स्पष्ट उल्लेख है। संघ ने इस घटना को प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी बताया। संघ का कहना है कि यह सिर्फ एक BLO की आत्महत्या नहीं, यह एक शिक्षक, एक कार्मिक और पूरी शिक्षा व्यवस्था की हत्या है। जब सिस्टम संवेदनशील होना बंद कर दे, तब ऐसी त्रासदियां जन्म लेती हैं।
*शिक्षा व्यवस्था में काम करने वालों पर अत्यधिक मानसिक दबाव अब जान लेने लगा है*
संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि कई अधिकारी अपनी रिपोर्ट और रैंकिंग सुधारने की लालसा में ज़मीनी कर्मचारियों को मशीन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
कम समय में अधिकतम कार्य की दौड़ में वे यह भूल चुके हैं कि BLO हो या शिक्षक, वे इंसान हैं, कोई रोबोट नहीं।
*मानसिक तनाव वास्तविक है और यह मौत उसका सबसे बड़ा प्रमाण है*
अत्यधिक कार्यभार, धमकियां, प्रताड़ना, असुरक्षित कार्य वातावरण और अमानवीय टारगेट संस्कृति ने स्थिति को भयावह बना दिया है। यह घटना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि उन सभी व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न है, जो शिक्षा और शिक्षण से जुड़े कर्मचारियों को लगातार दबाव में धकेल रही हैं। प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “राज्य सरकार बताएं, आखिरकार कितने और कर्मचारी मरेंगे तब व्यवस्था सुधरेगी। यह आत्महत्या नहीं, यह सिस्टम द्वारा की गई हत्या है। जिस शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए, उसी के कार्मिकों को प्रताड़ित कर मौत की ओर धकेला जा रहा है। शिक्षकों, BLOs और शिक्षा से जुड़े हर कर्मचारी को सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार मिलना चाहिए और सरकार इसमें बुरी तरह फेल हो रही है।”
बिट्टू ने कहा कि यह घटना पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है।
अगर आज आवाज़ नहीं उठाई गई, तो कल ऐसी घटनाएँ सामान्य हो जाएंगी — और यह शिक्षा के भविष्य को खतरनाक दिशा में ले जाएगा।
*संयुक्त अभिभावक संघ की मांगें*
* संबंधित अधिकारियों पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाए।
* BLOs और शिक्षण से जुड़े सभी कार्मिकों पर काम का दबाव वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से निर्धारित किया जाए।
* धमकी देने, प्रताड़ना और मानसिक शोषण को अपराध की श्रेणी में लाकर सख्त दंड निर्धारित किए जाएं।
* सभी शिक्षण व चुनावी कार्य में लगे कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा नीति बनाई जाए।
संयुक्त अभिभावक संघ ने स्पष्ट कहा है कि “एक कार्मिक की मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था की असफलता है। इसे अनदेखा करना अब अपराध होगा।”