जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): संयुक्त अभिभावक संघ ने एक बार फिर निजी स्कूलों पर मनमानी का आरोप लगाया है। संघ के अनुसार, आरटीई (Right to Education) के तहत प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बनाया जा रहा है। संघ ने बताया कि पिछले सप्ताह अभिभावकों की शिकायतों के दबाव में शिक्षा विभाग ने 21 निजी स्कूलों को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया था। नोटिस से दबाव में आए स्कूल संचालकों ने अब नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। पहले अभिभावकों को बुलाकर शिकायत वापसी के लिए मजबूर किया गया, फिर शपथ पत्र (एफिडेविट) जमा करवाने की शर्त रखी गई और अब नई शर्त के रूप में एनओसी (No Objection Certificate) की मांग की जा रही है। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन ने कहा —
"यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। निजी स्कूल लगातार नए-नए बहाने बनाकर आरटीई दाखिलों में बाधा डाल रहे हैं। पहले शिकायत वापसी, फिर एफिडेविट और अब एनओसी का दबाव बनाना सीधा-सीधा शिक्षा विभाग की गाइडलाइन की अवहेलना है। यदि सरकार और विभाग तुरंत हस्तक्षेप नहीं करेंगे तो अभिभावक बड़े स्तर पर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।"
संघ ने उदाहरण देते हुए कहा कि टैगोर इंटरनेशनल स्कूल ने सोमवार को अभिभावकों को बुलाकर स्पष्ट तौर पर एनओसी लाने की मांग की और तभी बच्चों को दाखिला देने की बात कही। इसी प्रकार जेएलएन मार्ग स्थित भारतीय विद्या आश्रम स्कूल ने भी अभिभावकों से एनओसी की शर्त रख दी। वहीं एसएमएस स्कूल, दा पैलेस स्कूल, ध्रुव बाल निकेतन सहित दर्जनों स्कूल, जिन्हें हाल ही में नोटिस जारी हुए थे, आज भी अपने रुख पर अड़े हुए हैं। इन स्कूलों का कहना है कि “शिक्षा विभाग तो ऐसे ही नोटिस भेजता रहेगा, हम कोर्ट के आदेश के बाद ही दाखिले पर विचार करेंगे।” संघ ने इसे गंभीर मामला बताते हुए शिक्षा विभाग से मांग की है कि ऐसे स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, जो गरीब बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश से वंचित कर रहे हैं।