अजमेर (श्रीराम इंदौरिया): संयुक्त अभिभावक संघ ने आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग की कार्रवाई और चेतावनी के बावजूद अजमेर जिले के अधिकांश निजी स्कूल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे। अभिभावकों की शिकायत पर शिक्षा विभाग ने अजमेर के डीपीएस स्कूल की जांच की और दाखिला देने के आदेश जारी किए। विभाग ने यहाँ तक चेतावनी दी कि आदेश की अवहेलना पर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। इसके बाद ही स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को फोन कर बच्चों को दाखिला देने की बात कही, लेकिन शर्त रखी कि वे एफिडेविट साथ लेकर आएँ। दबाव में अभिभावकों ने एफिडेविट दिए, तब जाकर बच्चों का दाखिला हुआ और पढ़ाई शुरू हो पाई।
संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि यह केवल एक उदाहरण है। अजमेर जिले में ऐसे सैकड़ों स्कूल हैं, जो विभागीय आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं और लगभग 6,000 बच्चे अब भी शिक्षा से वंचित हैं। ऑल सेंट गर्ल्स स्कूल, ऑल सेंट बॉयज़ स्कूल और डीपीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल तबीजी जैसे संस्थान तो अभिभावकों से साफ़ कह रहे हैं कि “कोर्ट ने दाखिले पर रोक लगाई है, आदेश आने तक हम दाखिले नहीं देंगे।” प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि डीपीएस स्कूल को आखिरकार अभिभावकों की एकजुटता और विभाग की सख़्ती के आगे झुकना पड़ा, लेकिन अन्य स्कूलों के हठ के कारण हज़ारों बच्चे पाँच महीने से शिक्षा से वंचित हैं। शिक्षा विभाग का सुस्त रवैया अभिभावकों को मानसिक प्रताड़ना दे रहा है और यही कारण है कि निजी स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
*संघ का आरोप है*
“निजी स्कूल खुलेआम विभागीय आदेशों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। एफिडेविट और शिकायत वापसी की माँग ग़ैरक़ानूनी है। यदि शिक्षा विभाग ने सख़्त कार्रवाई नहीं की, तो यह संदेश जाएगा कि विभाग स्वयं इन स्कूलों का संरक्षक है।”
*संघ की माँगें*
* ऐसे स्कूलों की मान्यता तत्काल रद्द की जाए।
* चेतावनी नोटिस की अवहेलना करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो।
* अभिभावकों को सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिलाया जाए ताकि उन पर दबाव न डाला जा सके।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा विभाग ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो अभिभावक सड़कों पर उतरकर राज्यव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होंगे।