अलवर (श्रीराम इंदौरिया): दलित अधिकार केंद्र के तत्वावधान में अग्रवाल धर्मशाला, अलवर में सुरक्षात्मक प्रावधानों एवं पोस एक्ट पर एक दिवसीय जिला स्तरीय क्षमतावर्धन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र के जिला समन्वयक शैलेष गौतम ने किया। उन्होंने शिविर के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए दलित अधिकार केंद्र की नीतियों, कार्य प्रणाली एवं गतिविधियों की जानकारी दी। केंद्र के मुख्य कार्यकारी एडवोकेट हेमंत मीमरोठ ने दलित समुदाय पर हो रहे जातिगत भेदभाव, अत्याचार, भूमि विवाद, पोस्को मामलों, गंभीर मारपीट आदि विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं बच्चों पर बढ़ते अपराधों को रोकना समय की आवश्यकता है तथा दलितों के लिए आवंटित बजट का उपयोग उन्हीं के विकास में होना चाहिए। साथ ही उन्होंने पीसीआर एक्ट व अन्य संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी भी दी। केंद्र की जिला समन्वयक दोसा एडवोकेट सुनीता बैरवा ने सुरक्षा की आवश्यकता और उसके सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के अधिकारों की जानकारी आवश्यक है। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए जिला स्तरीय पुलिस सुरक्षा केंद्र एवं हेल्पलाइन 1090 व 1092 की उपयोगिता पर भी विस्तार से बताया। एडवोकेट चन्दालाल बैरवा (सहायक निदेशक, केंद्र) ने पोस कानून की आवश्यकता, उसकी पृष्ठभूमि एवं प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने विशाखा गाइडलाइन से लेकर पोस एक्ट तक की यात्रा बताते हुए सभी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) गठित करने की अनिवार्यता समझाई। साथ ही उन्होंने नरेगा, आरटीआई व अन्य कानूनों पर भी चर्चा की। केंद्र के राज्य समन्वयक पलाश ने कहा कि महिलाओं का शिक्षित होना उनके अधिकारों की जानकारी व सशक्तिकरण के लिए अत्यंत जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ता श्याम लाल जाजोरिया ने मानवाधिकारों पर चर्चा करते हुए एक साधारण नागरिक से मानवाधिकार रक्षक बनने तक की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। दलित महिला मंच की सुशीला रानी ने दलित अधिकार केंद्र की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि केंद्र ने हमेशा ही दलित एवं महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर समाज में आगे बढ़ाया है। एडवोकेट प्रकाश चंद सागर ने दलित महिलाओं एवं बच्चों पर बढ़ते अत्याचारों पर चिंता व्यक्त की तथा एससी/एसटी एक्ट, पोस्को, घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के महत्वपूर्ण प्रावधानों को समझाया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ताओं शंकर लाल बौद्ध, शेर सिंह बौद्ध, कमला, एडवोकेट निशा खेहरा, एडवोकेट नेहा घावरी, शकुंतला, राजेंद्र, रामचरण, मातादीन, लक्ष्मीनारायण, चैनसुख आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।