नेपाल/जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): नेपाल की राजनीति के इतिहास में पहली बार एक महिला प्रधानमंत्री के रूप में न्यायमूर्ति श्रीमती सुशीला कार्की के चयन पर अंतर्राष्ट्रीय समरसता मंच एवं इंडो-नेपाल समरसता ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े सभी प्रेरक सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी है। अंतर्राष्ट्रीय समरसता मंच के प्रतिनिधियों ने बताया कि मंच पिछले कई वर्षों से भारत और नेपाल की वैदिक कालीन सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक रिश्तों तथा आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर प्रसारित और सुदृढ़ करने की दिशा में कार्यरत है। ऐसे में नेपाल जैसे पड़ोसी और सांस्कृतिक रूप से घनिष्ठ राष्ट्र में पहली बार किसी महिला का सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होना, दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक धरोहर और प्रगतिशील सोच का प्रतीक है।
*डॉ.कुलदीप प्रसाद शर्मा ने जताया गर्व*
मंच के मुख्य सलाहकार डॉ.कुलदीप प्रसाद शर्मा (एडवोकेट, ईस्ट-वेस्ट लॉ फर्म) ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि न्यायमूर्ति सुशीला कार्की लंबे समय से ईस्ट-वेस्ट लॉ फर्म की संरक्षिका रही हैं और उनके मार्गदर्शन में यह संस्था भारत-नेपाल के विधिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा –“सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री पद पर आसीन होना केवल नेपाल ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई राह दिखाने वाला साबित होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श बनेगा।”
*प्रेरक सदस्यों की सामूहिक प्रतिक्रिया*
अंतर्राष्ट्रीय समरसता मंच के प्रेरक सदस्यों ने सामूहिक वक्तव्य में कहा कि श्रीमती कार्की के नेतृत्व में नेपाल राष्ट्र नई ऊर्जा और सशक्त दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगा। उनसे उम्मीद है कि वे सामाजिक न्याय, विधिक व्यवस्था, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा अंतर्राष्ट्रीय समरसता को और अधिक मजबूत करेंगी। सदस्यों ने यह भी कहा कि भारत और नेपाल केवल भौगोलिक रूप से पड़ोसी राष्ट्र नहीं हैं, बल्कि रामायण और महाभारत काल से जुड़े सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों के कारण दोनों देशों की आत्मा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री कार्की का नेतृत्व इस ऐतिहासिक विरासत को और सुदृढ़ करेगा।
*मंच की भावी योजनाएँ*
मंच के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी समय में इंडो-नेपाल समरसता ऑर्गेनाइजेशन द्वारा दोनों देशों के युवाओं को जोड़ने हेतु विभिन्न सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम, विधिक सेमिनार एवं वैदिक अध्ययन कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी। इन आयोजनों का उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सेतु को और मजबूत बनाना है।