कलियुग मे भगवत भक्ति का सबसे श्रेष्ठ साधन भगवान का नामोच्चारण

AYUSH ANTIMA
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चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): भगवान के नाम का उच्चारण मन के समस्त पापों को समाप्त करने मे सक्षम है। मनुष्य ज़ब मुख से भगवान के नाम का उच्चारण करता है तब परमात्मा उसके हृदय मे आकर बैठ जाते है तथा जो मनुष्य के मन में कलुशितता होती है, उसको साफ कर देते है। कलियुग मे भगवत भक्ति का सबसे श्रेष्ठ साधन भगवान का नामोच्चारण है। उक्त कथन शहर के पुराना पोस्ट ऑफिस के पास चल रहीं भागवत कथा के तीसरे दिन वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने अजामिल प्रसंग मे कहे। तिवाड़ी ने समस्त स्रोताओ से अधिकाधिक भगवान के नाम के उच्चारण की आदत डालने का आह्वान किया। कथा मे स्वर्ग-नर्क का वर्णन प्रहलाद कथा समुद्र मंथन तथा भगवान वामन प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के दौरान रंगकर्मी सुरेश शेखावत के द्वारा सजाई गई मनोहारी भगवान वामन की सजीव झांकी तथा राजू भगत व लाल राणा के द्वारा सुन्दर भजनों की प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय बन गया। इससे पूर्व यजमान रामवतार शर्मा ने सपत्नीक आचार्य नरेश जोशी, आमोद शर्मा, विक्रम शर्मा के वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत व व्यास पूजन किया। इस दौरान महेन्द्र शर्मा, अशोक शर्मा, प्रमोद शर्मा, अनिल शर्मा , सुशील कुमार, विनोद कुमार लाम्बीवाला, सेवानिवृत कोषाधिकारी ओमप्रकाश टेलर, सिद्धार्थ शर्मा, श्याम सुंदर साखुवाला, संजय शर्मा श्योपुरा, विश्वनाथ ढाढीटिया, पंडित राजेश दाधीच, जगदीश डाबलेवाला, निरंजन कलगांव वाला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष मौजूद रहे।

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