नॉएडा/यूपी: भारतीय राजनीति और हिंदुत्व की धारा को नई दिशा देने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आधारित हिंदी फिल्म “अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी” का आधिकारिक ऐलान किया गया है। यह फिल्म उनके जीवन, संघर्ष और विचारधारा को बड़े परदे पर प्रस्तुत करेगी। फिल्म में अनंत विजय जोशी योगी आदित्यनाथ की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। उनके साथ जाने-माने अभिनेता परेश रावल, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, अजय मेंगी, पवन मल्होत्रा, गरिमा विक्रांत सिंह और राजेश खट्टर भी अहम भूमिकाओं में नजर आएँगे। निर्माताओं का कहना है कि यह फिल्म केवल योगी आदित्यनाथ की जीवनी नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति और समाज के उस परिवर्तनशील दौर का सिनेमाई चित्रण भी होगी, जिसने हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा को नई परिभाषा दी। फिल्म के निर्देशक ने बताया कि कहानी में गोरखपुर मठ से लेकर उत्तर प्रदेश की सत्ता तक योगी आदित्यनाथ के सफर को गहराई से दिखाया जाएगा। साथ ही, उनके जीवन के उन अंशों को भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिन्हें आम जनता शायद ही जानती हो। फिल्म का टाइटल “अजेय” (Ajey) स्वयं यह संदेश देता है कि यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक विचारधारा की कहानी है, जो हर चुनौती और विरोध के बीच भी अडिग और अजेय खड़ी रही।
“अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी” शीघ्र ही सिनेमाघरों में रिलीज होगी। निर्माताओं ने इसे भारतीय सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर बताया है।
*फ़िल्म प्रमोशन का आगाज़*
फ़िल्म की प्रमोशन हेतु नोएडा स्थित संचालक सुरेश चव्हाणके के सानिध्य मे सुदर्शन न्यूज़ चैनल के स्टूडियो में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर फिल्म अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरुहुआ’, फिल्म के निर्देशक-निर्माता एवं पूरी टीम मौजूद रही।
निरुहुआ ने कहा कि “योगी जी की फ़िल्म में काम करने का अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह केवल एक महान पुरुष की जीवन कथा नहीं, बल्कि हिन्दुत्व के उस उदारवादी और सनातनी स्वरूप का परिचय है, जिसे दर्शक बड़े परदे पर देखेंगे।” फिल्म की इस प्रमोशन में थाईलैंड से आए खास मेहमान राजदूत परविंद्र सिंह, नेपाल से आए गोरखा रेजिमेंट के टाइगर राणा, व्यापारी विकास के सी और लेखक रविंद्र आर्य भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
*अंतरराष्ट्रीय विवाद: इस्लामिक मुल्कों में बैन*
फिल्म अजेय 2 को लेकर अंतरराष्ट्रीय विवाद भी सामने आया है। क़तर और सऊदी अरब ने अपने-अपने देशों में इस फिल्म पर प्रतिबंध (Ban) लगा दिया है। इन देशों की आपत्ति यह है कि भगवाधारी शासक की जीवनी और उनकी विचारधारा को दिखाए जाने से इस्लामिक समाज में असहमति और विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है।
जानकारों का कहना है कि यह बैन केवल राजनीतिक दबाव का परिणाम है, ताकि दुनिया योगी आदित्यनाथ जैसे भगवाधारी शासक की जीवनकथा और विचारधारा को न जान सके।
कट्टरपंथी ताक़तें इस मुद्दे पर एकजुट होती दिख रही हैं, जबकि हैरानी की बात है कि भारत के अंदर का तथाकथित “Bollywood सेक्युलर गिरोह” और “Freedom of Speech” गिरोह भी इस मामले पर खामोश है। यह बैन एक बड़े सवाल को जन्म देता है कि क्या दुनिया को भारत के राष्ट्रवादी नेतृत्व और उसकी सनातनी विचारधारा से वंचित रखने की साज़िश चल रही है ?