आयातित नेताओं की बैसाखी पर झुन्झुनू भाजपा जिलाध्यक्ष

AYUSH ANTIMA
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शेखावाटी का झुन्झुनू जिला वीर प्रसूता भूमि के गौरव के साथ ही संतों की तपोभूमि भी रही है। राजनीतिक रूप से देखें तो शेखावाटी की धुरी रहा है झुन्झुनू जिला, जिसकी राजनीति चूरू व सीकर जिलों को भी प्रभावित करती है।‌ झुन्झुनू जिला नेताओं की निजी महत्वाकांक्षा के चलते आयाराम गयाराम के लिए भी विख्यात है क्योंकि यहां के नेता सत्ता के साथ रहना पसंद करते हैं। पूरे देश में भाजपा सत्ता के शिखर पर अपनी चमक को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बरकरार कर रखी है। यही कारण है कि भाजपा में आयातित नेताओं का जमावड़ा नवनियुक्त जिलाध्यक्ष के इर्द-गिर्द देखा जा सकता है। बसपा, लोजपा व कांग्रेस से आये नेताओं ने भाजपा पर कब्जा कर लिया, जिसकी परिणति यह रही कि भाजपा संगठन में गुटबाजी हावी हो गई। भाजपा के प्रति निष्ठा व समर्पण भाव सत्ता के आगे गोण हो गया व जिन नेताओं ने दरी बिछाने से लेकर बूथ लेबल तक भाजपा के साथ संघर्ष किया था, उनको हासिए पर धकेल दिया। यही गुटबाजी का नतीजा है कि नवनियुक्त जिलाध्यक्ष के मनोनयन को लेकर भी विरोध के स्वर देखने को मिले थे। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए थे कि नवनियुक्त जिलाध्यक्ष का पैनल में ही नाम नहीं था यानी झुन्झुनू जिले को पेराशूट भाजपा जिलाध्यक्ष मिला, जैसे राजस्थान को भजन लाल शर्मा के रूप में मुख्यमंत्री मिला। प्रदेश नेतृत्व, जिला प्रभारी मंत्री कितने ही दावे करे कि भाजपा एकजुट है। इस दावे की पोल इसी बात से सामने आती है कि प्रदेश अध्यक्ष ने अब तक अपनी कार्यकारिणी का गठन नहीं किया है। चुरू जिले में जिलाध्यक्ष का मनोनयन होते ही उन्होंने अपनी टीम बना ली लेकिन इस गुटबाजी के चलते झुन्झुनू जिलाध्यक्ष अपनी टीम नहीं बना पाई है। आयाराम गयाराम की राजनीति इस बात से स्पष्ट दिखाई देती है कि टिकट न मिलने पर बागी होकर चुनाव मैदान में कूद पड़ते हैं और अगले चुनावों में वही भाजपा के कमल के साथ चुनावी दंगल में दिखाई देते हैं यानी दो नेताओं के अलावा झुन्झुनू भाजपा के पास कोई नेता ही नजर नहीं आता है। उपचुनावों में भाजपा ने कांग्रेस के अजेय गढ़ को ध्वस्त किया लेकिन इस जीत के असली किरदार निर्दलीय राजेन्द्र गुढ़ा थे न कि भाजपा की एकजुटता। ऐसी संभावना कम ही है लेकिन यदि नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अपनी टीम की घोषणा करती है तो यह टीम इस गुटबाजी की आग में घी का काम करेगी। भाजपा ने नवनियुक्त जिलाध्यक्ष को लेकर जो निर्णय लिया है, उसके दूरगामी परिणाम आगामी नगर निकाय व पंचायती चुनावों में देखने को मिल सकते हैं।

*क्रमशः आगामी कड़ी का इंतजार करें .........*

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