मोदी की बैसाखियों के सहारे नहीं चलता संगठन

AYUSH ANTIMA
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केंद्र व राज्यों की परिस्थितियों में बहुत फर्क होता है। यदि पार्षद के चुनावों में भाजपा का उम्मीदवार मोदी का गुणगान करें और मोदी की गारंटी की लिस्ट वार्ड वासियों के समक्ष रखने के बाद वह जीत की आशा रखता है तो यह उसकी नासमझी है। अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन बड़े स्तर पर मनाया गया और मनाना भी चाहिए क्योंकि उनके कार्यकाल की उपलब्धियों को देखते हुए इस सम्मान के हकदार भी है लेकिन यह देखा गया है कि भाजपा का एक सामान्य कार्यकर्ता भी मोदी उवाच में लगा हुआ है। झुंझुनूं जिले की बात करें तो संगठन का नेतृत्व भी मोदी उवाच से वंचित नहीं है। जहां भी आयोजन हो रहे हैं, वहीं चिर परिचित चेहरे उस आयोजन में नजर आते हैं क्योंकि भाजपा जिलाध्यक्ष व कार्यकर्ताओं में सामंजस्य की कमी है। स्वच्छता का संदेश झाड़ू हाथ में लेकर फोटो खिंचवाकर दिया गया लेकिन यथार्थ के धरातल पर देखें तो परिणाम शून्य ही नजर आता है। जब जिला मुख्यालय का यह हाल है, जहां भाजपा विधायक हैं व जिलाध्यक्ष भी झुन्झुनू की ही शोभा बढ़ा रहे हैं लेकिन यह सेवा पखवाड़ा अभिनंदन समारोह बनकर रह गया है। जयपुर से पार्टी के पदाधिकारी आते हैं व एसी हाल में बैठकें होती है। शाल, दुपट्टे, माला पहनाई जाती है और वही मोदी उवाच सुनने को मिलता है। शायद राजस्थान केन्द्र शासित प्रदेश बन गया। राज्य सरकार की योजनाओं व जिले के विकास की कही भी गूंज नहीं सुनाई देती है। विकास के नाम पर इतना जरूर देखने को मिला है कि बजट घोषणाओं की जो वितीय स्वीकृति जारी होती है तो तुरंत उसको लपक कर विकास पुरूष बन जाते हैं कि उनके प्रयासों से जिले में विकास की गंगा बहती ही नहीं बल्कि बाढ़ आ गई है। जिला भाजपा संगठन की बात करें तो यह ताश के पत्तों की तरह बिखराव की स्थिति में है। इसका मूल कारण नवनियुक्त जिलाध्यक्ष का उन्हीं चिर परिचित चेहरो से घिरा रहना है। इसमें कहीं भी संशय नहीं होना चाहिए कि पुराने निष्ठावान कार्यकर्ता किसी भी पार्टी की ताकत होते हैं, आयातित नेताओं व कार्यकर्ताओं की निष्ठा केवल सत्ता तक ही सिमित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल व उनके कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धियों से देश का आवाम परिचित है और तभी उनको तीसरी बार जनता का आशीर्वाद मिला है। उनके उवाच के सहारे न तो संगठन चलेगा और न ही राजनीति। इसके लिए खुद को जनता के बीच स्थापित करना होगा व हर वर्ग व जाति के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तवज्जो देनी होगी।

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