नेपाल में अस्मिता भंडारी: पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री की दौड़ में

AYUSH ANTIMA
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नेपाल/दिल्ली: अखंड भारत विश्व हिंदू महासंघ की अंतरराष्ट्रीय अध्यक्षा, मातृशक्ति माननीया अस्मिता भंडारी का नाम नेपाल सरकार में पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री के रूप में चर्चा में है। यदि वे यह जिम्मेदारी ग्रहण करती हैं तो यह कदम न केवल भारत–नेपाल संबंधों को नई ऊँचाई देगा बल्कि हिंदू–बौद्ध संस्कृति और सनातन मूल्यों के वैश्विक संदेश को भी और प्रखर बनाएगा। यह संभावना नेपाल की सांस्कृतिक राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत और हिंदू संस्कृति, राजशाही तथा वैश्विक पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

*अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया*

थाईलैंड के वर्ल्ड पीस इंस्टिट्यूट (यूनाइटेड नेशन्स) से संबद्ध राजदूत एवं प्रेजिडेंट, वर्ल्ड बुद्धिस्ट फेडरेशन परविंदर सिंह ने कहा कि यदि अस्मिता भंडारी जैसी महिला, जो देशहित और हिंदू समाज की जागृति के लिए निरंतर सक्रिय रही हैं, नेपाल की प्राथमिकता बनती हैं, तो भारत–थाईलैंड संबंध और भी मजबूत होंगे। उन्होंने आगे कहा कि बौद्ध राष्ट्र थाईलैंड के लिए भी यह सकारात्मक समन्वय होगा। वहीं, नेपाल, जो विश्व का एकमात्र हिंदू राष्ट्र है—ने हाल ही में माओवादी और कम्युनिस्ट प्रभाव से बाहर निकलने के लिए भारी संघर्ष और बलिदान दिए हैं। इस पृष्ठभूमि में अस्मिता भंडारी जैसी परखर नेता नेपाली Gen-Z पीढ़ी को हिंदू और बौद्ध संस्कृति की ओर प्रेरित करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

*सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक*

विश्व हिंदू महासंघ ने इस संभावना को “प्रकृति और ईश्वरीय व्यवस्था का उद्घोष” बताया है। संगठन का मानना है कि यह घटना प्रभु श्रीराम के आदर्शों, ऋषि परंपरा और सनातन संस्कृति के वैश्विक पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगी।

*मोदी–योगी नेतृत्व का संदर्भ*

संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राष्ट्रभक्त नेतृत्व को भी रेखांकित किया।
संगठन के अनुसार, राम मंदिर निर्माण, कश्मीर समाधान और महाकुंभ जैसे महापर्व इनके नेतृत्व में विश्व बंधुत्व, त्याग और अखंडता के प्रतीक बने हैं।

*नेपाल की जनभावना और अस्मिता भंडारी*

नेपाल की आम जनता लंबे समय से राजशाही और राम आदर्शों पर आधारित व्यवस्था की अपेक्षा रखती है। इस जनजागरण और सत्य–अहिंसा–सौहार्द की भावना में अस्मिता भंडारी को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलना एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।

*भारतवंशियों की प्रतिक्रिया*

भारत और प्रवासी भारतीय समाज में भी इस संभावना को उम्मीद की किरण मानते हुए स्वागत किया जा रहा है। विश्व हिन्दू महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कालिका पीठाधीश्वर महंत श्री सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा कि माननीया अस्मिता भंडारी युवाओं को सत्य पथ और राष्ट्र प्रथम की भावना से मार्गदर्शन देंगी।

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