नई दिल्ली (श्रीराम इंदौरिया): दिल्ली विश्वविद्यालय में भारत-जापान टैलेंट ब्रिज करियर संगोष्ठी का आयोजन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.योगेश सिंह ने की। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय सदैव अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करता रहा है। भारत और जापान के बीच शैक्षणिक एवं पेशेवर आदान-प्रदान से न केवल विद्यार्थियों को वैश्विक अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि दोनों देशों की साझेदारी भी और सुदृढ़ होगी। स्वागत करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो.रंजन कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यह पहल भारतीय विद्यार्थियों के लिए करियर उन्नति और कौशल-विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी, साथ ही जापान के साथ शिक्षा और संस्कृति का सेतु भी बनाएगी। उन्होंने इस आयोजन को विश्वविद्यालय की वैश्विक भूमिका को प्रखर बनाने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया।
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर की निदेशक प्रो.रजनी अब्बी, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.विकास गुप्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय की डीन अकादमिक गतिविधियाँ प्रो.रत्नाबली, विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों के प्राचार्य एवं निदेशक, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय के पदाधिकारी, कर्मचारी तथा सैकड़ों विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। जापानी प्रतिनिधिमंडल का हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय परिवार ने इस कार्यक्रम को एक ऐतिहासिक क्षण का स्वरूप प्रदान किया।
प्रतिनिधिमंडल को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों एवं विविध परिसरों से परिचित कराया गया। तत्पश्चात मिरांडा हाउस में आयोजित करियर संगोष्ठी में डायरेक्टर्स इंक., रिमो एलएलसी, योजना साइंस एंड टेक्नोलॉजी, निचि-इन एशिया, टैलेंडी बाय टेक जापान, डेलॉइट जापान समेत अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने भारतीय विद्यार्थियों के लिए रोजगार और कौशल-विकास की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
संगोष्ठी की सफलता में मिरांडा हाउस की प्राचार्या प्रो.विजय लक्ष्मी नन्दा का अप्रतिम सहयोग रहा। कार्यक्रम के संचालन एवं संगठन में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय की पूरी टीम का सक्रिय योगदान रहा। जिसमें संयुक्त अधिष्ठाता प्रो.हेना सिंह, प्रो.अमित वर्धन, प्रो.संगीता गदरे, प्रो.अञ्जन कुमार, तथा उप अधिष्ठाता डॉ.ग्लोरी, डॉ.निधि, डॉ.सुरेश, डॉ.प्रमोद और डॉ.चंद्रप्रकाश सहित सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहयोग प्रदान किया। यह आयोजन न केवल दिल्ली विश्वविद्यालय की अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग एवं दूरदृष्टि का प्रतीक है, बल्कि भारत-जापान मैत्री और सहयोग का एक सशक्त मंच भी है। इस अभिनव पहल ने निःसंदेह विश्वविद्यालय की अन्तर्राष्ट्रीय भूमिका को और अधिक प्रखर बनाया है तथा भविष्य में भारत-जापान सहयोग के नए अध्याय की नींव रखी है।