आस्था की उड़ान नहीं चढ़ी परवान

AYUSH ANTIMA
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राजस्थान के शेखावाटी अंचल के दो विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्रीखाटूश्याम जी व सालासर बालाजी स्थित है। इन दोनो स्थलों पर प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम देखने को मिलता है। इन दोनो धार्मिक स्थलों के दर्शन करवाने को लेकर दिल्ली से हेलिकॉप्टर सेवा एक निजी कंपनी द्वारा शुरू की थी व इसका प्रचार प्रसार भी खूब किया गया। एक ही दिन मे दोनो स्थानों के दर्शन कर दिल्ली वापिस लोटने की इस महत्वाकांक्षी योजना को सरकारी नियम कायदों ने जमीन दिखा दी। विदित हो दिल्ली से एक ही दिन में खाटूश्यामजी मंदिर व सालासर बालाजी मंदिर के दर्शन को लेकर 23 अगस्त को उड़ान भरी थी। पहले ही दिन कवि कुमार विश्वास अपने परिवार सहित दर्शन करने पहुंचे थे लेकिन अगले ही दिन यह सेवा भोलाराम के जीव की तरह सरकारी फाइलों मे भटकने लगी और प्रशासनिक मर्यादा के जाल में फंसकर आस्था की इस उड़ान को ब्रेक लग गये। सूत्रों की मानें तो जिला प्रशासन ने दिल्ली से इस सेवा के लिए एक दिन की ही अनुमति दी थी जबकि चुरू प्रशासन ने सालासर दर्शन के लिए एक दिन की भी अनुमति नहीं दी थी। मिडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हवाई पट्टी पर हेलिकॉप्टर लैंडिंग के नियम है और चार्ज लगता है। नियमित हवाई सेवा के लिए स्पष्ट गाइडलाइन का अभाव था। इसके साथ ही यह भी प्रचारित किया गया कि यात्रियों को वीआईपी दर्शन भी इसी पैकेज में करवाने की व्यवस्था होगी लेकिन प्रशासन ने यह सुविधा सरकारी प्रोटोकॉल प्राप्त लोगों के लिए ही निर्धारित कर रखी है। बंद होने को लेकर कंपनी ने दावा किया कि खराब मौसम के कारण यह सेवा स्थगित की है और इसे जल्द ही शुरु किया जाएगा। इस सेवा में दोनो धार्मिक स्थलों में श्रध्दालुओ का हुजूम है और इन स्थलों पर स्थाई हैलीपेड भी नहीं है। इस सेवा के लिए दिल्ली से सालासर खाटूश्यामजी व दिल्ली वापसी का प्रति व्यक्ति करीब 95 हजार रुपये किराया रखा गया है। इस सेवा का प्रचार प्रसार के साथ ही कुमार विश्वास के बहुत से विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए लेकिन यह हवाई योजना सरकारी फाइलों में फंसकर हवा हवाई हो गई। अब यदि निजी कंपनी व सरकार के नियम कायदे देखें तो दोनों में विरोधाभास नजर आता है। जब सरकारी अनुमति नहीं मिली तो इसके प्रचार प्रसार को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए थी । जनता को बरगलाने का अधिकार आखिर इस निजी कंपनी को किसने दिया। सरकार को भी इस सेवा को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश देने चाहिए थे। आखिर आस्था की इस उड़ान पर ब्रेक लगाने में क्या कारण रहे ।

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