अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच नेपाल राष्ट्र में शहीद हुऐ 72 परिवार को देगा आर्थिक सहायता

AYUSH ANTIMA
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जयपुर/काठमाण्डौ (श्रीराम इंदौरिया): नेपाल राष्ट्र में हाल ही मे हुए जेन जी आन्दोलन में शहीद हुऐ जवानो के परिवार को अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच द्वारा विशेष आर्थिक सहायता राशी सम्मानपूर्वक भेट की जायेगी। मंच के बौर्ड सलाहकार सदस्य नीरज गोयल पदमपुर ने बताया की अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच एंव इण्डो-नेपाल समरसता मंच के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति परमानन्द झा प्रथम उपराष्ट्रपति नेपाल सरकार द्वारा भारत-नेपाल के सामाजिक रिश्तो को बढाने तथा मंच में नेपाल राष्ट्र के महननीय व्यक्तियो का जुड़ाव होने से यह प्रस्ताव पारित किया गया है। जेन जी आन्दोलन में जो 72 व्यक्ति शहीद हुऐ है, जिनको नेपाल सरकार द्वारा शहीद का दर्जा दिया गया है, उन सभी शहीदो को मंच के प्रेरक सदस्यो के सहयोग से आर्थिक मदद प्रदान की जावेगी। सभी सदस्यो से अनुरोध किया गया है की वो ज्यादा से ज्यादा अपना आर्थिक आशीर्वाद इस पुनीत कार्य के लिए मंच को प्रदान करे। मंच के मुख्य सलाहकार डॉ.कुलदीप प्रसाद शर्मा एडवोकेट ईस्ट-वेस्ट लॉ फर्म नेपाल ने बताया की विश्व रत्न स्व.श्री महावीर प्रसाद टोरड़ी, जो नेपाल राष्ट्र के प्रथम उपराष्ट्रपति नेपाल सरकार के विशिष्ठ सलाहकार भी रहे है। मंच के संयोजक विश्व रत्न स्व.श्री महावीर प्रसाद टोरड़ी को नेपाल राष्ट्र में बहुत मान सम्मान दिया था। आज वो हमारे बीच नहीं है, फिर भी उनकी कार्य योजना को 25 राष्ट्रो में वेश्विक स्तर पर मंच के माध्यम से बढ़ाया जा रहा है। उनके सम्मान में मंच की हाई पावर कमेटी के सदस्य सुभाष जैन नेपाल के अनुरोध पर मंच द्वारा यह प्रस्ताव पास किया गया है की जैसे-जैसे मंच के पास सहयोग प्राप्त होगा, मंच उन शहीद परिवारो के सदस्यो को मंच द्वारा जाकर भेट किया जायेगा। मंच की इस पहल पर नेपाल राष्ट्र में नागरिको में खुशी की लहर देखने को मिली। सभी राजनैतिक पार्टियो के प्रमुख द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच एंव इण्डो-नेपाल समरसता मंच को धन्यवाद ज्ञापित किया। आर्थिक सहायता शहीदो के लिए भारत के सभी राज्यो में मंच के प्रेरक सदस्यो से अनुरोध कर सहयोग प्राप्त किया जा रहा है। सहयोग दाता अपना सहयोग इण्डो-नेपाल समरसता ऑर्गोनाईजेशन खाते में जमा कराने का अनुरोध सार्वजनिक रूप से किया गया है। यह एक अनूठी पहल है। मंच द्वारा आर्थिक सहायता देने की घोषणा भारत में नेपाली राजदूत डॉ.शंकर शर्मा से प्रेरित होकर की गई है।

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