झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): पीरामल गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बगड़ के गर्ल्स हॉस्टल में 31 अगस्त को 14 वर्षीय छात्रा जीविका शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। मृतका के पिता दुर्गेश कुमार शर्मा, निवासी गांव वजीरपुर, तहसील हरसरू, जिला गुरुग्राम (हरियाणा) ने झुंझुनू पुलिस अधीक्षक को एक विस्तृत दरखास्त सौंपकर स्कूल प्रशासन, वार्डन, डॉक्टरों और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
*प्रार्थी का आरोप*
पिता दुर्गेश कुमार शर्मा ने कहा है कि उनकी पुत्री जीविका उनकी इकलौती संतान थी। वह नौवीं कक्षा की छात्रा थी और कई वर्षों से पीरामल गर्ल्स स्कूल, बगड़ के हॉस्टल में रह रही थी। 29 अगस्त को जीविका ने अपनी ताई मंजू रानी से फोन पर बातचीत की थी, इसके बाद 31 अगस्त को उन्हें सूचना मिली कि उनकी बेटी ने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली है। पिता का आरोप है कि स्कूल प्रशासन और पुलिस की ओर से घटना को आत्महत्या बताया गया, लेकिन तथ्यों से मामला संदिग्ध प्रतीत होता है। जब उन्होंने प्रिंसिपल से पूछा तो उन्हें बताया गया कि बच्ची ने बेल्ट से सुसाइड किया, जबकि पुलिस ने कहा कि सुसाइड टाई से हुआ। जब वे सीएचसी बगड़ पहुँचे तो डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को 2:45 बजे अस्पताल लाया गया था लेकिन ईसीजी रिपोर्ट में समय 5:41 बजे दर्ज है। पिता का कहना है कि मृत व्यक्ति का ईसीजी नहीं हो सकता, इसका मतलब बच्ची उस समय तक जीवित थी। इस पर सवाल करने पर डॉक्टरों ने स्लिप छिपाने की कोशिश की और वहां से निकल गए।
*पुलिस और प्रशासन पर आरोप*
पिता ने आरोप लगाया कि मौके का वीडियो पुलिस के पास है लेकिन बार-बार मांगने पर भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। स्कूल और अस्पताल का भी कोई वीडियो या रिकॉर्ड उन्हें नहीं दिया गया। 01 सितंबर को थाना बगड़ में शिकायत देने के बावजूद कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि उनकी पुत्री की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है और इसमें स्कूल प्रशासन, डॉक्टरों और पुलिस की मिलीभगत है।
*पहले भी हुई घटनाएँ*
प्रार्थी ने बताया कि इसी हॉस्टल में पहले भी संदिग्ध घटनाएँ हो चुकी हैं। 31 जनवरी 2018 को कोमल यादव की संदिग्ध मौत हुई थी, जिस पर मर्ग दर्ज हुई। 31 मार्च 2018 को रीना चौधरी की मौत हुई थी, जिस पर एफआईआर दर्ज हुई, वहीं 21 मई 2018 को असीमा मलिक के लापता होने का मामला भी इसी हॉस्टल से दर्ज हुआ। इनमें से दो मामलों को दबा दिया गया, जबकि एक मामले में केस अब भी चल रहा है।
*वार्डन और डॉक्टरों पर सवाल*
पिता ने कहा कि वार्डन पूनम ने दोपहर 2:53 बजे फोन करके बच्ची को मृत बताया था, जबकि ईसीजी शाम 5:41 बजे किया गया। इसका मतलब है कि उनकी बेटी उस समय तक जीवित थी। यह मिलीभगत को दर्शाता है। उन्होंने वार्डन पर भी आरोप लगाया कि वह हॉस्टल में गैरकानूनी गतिविधियाँ चलाती हैं और छात्राओं की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।
*न्याय की मांग*
दुर्गेश कुमार शर्मा ने कहा कि जब उन्होंने जांच अधिकारी चन्द्रभान चौधरी से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन तक नहीं उठाया। मजबूर होकर उन्होंने प्रवर पुलिस अधीक्षक झुंझुनूं को दरखास्त सौंपकर मामले की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने, दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और सख्त कार्रवाई करने की मांग की। पिता ने कहा कि उन्हें सिर्फ अपनी इकलौती बेटी की आत्मा की शांति और न्याय चाहिए।