झुंझुनूं भाजपा संगठन में खींचतान व गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। इसका एक प्रमुख कारण है कि आयातित नेताओं ने संगठन में जड़े जमा ली है, जिनका कभी भी भाजपा की नितियों व सिध्दांतों से दूर का भी नाता नहीं रहा। यही कारण रहा कि विधानसभा चुनावों में भाजपा आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई। जिले के भाजपा संगठन में एक समय यह हाल था कि जब कांग्रेस के शासन मे जिले में सरकार के विरोध में प्रदर्शन होता था तो आम चर्चा रहती थी कि यह प्रदर्शन कौन सी भाजपा कर रही है। भाजपा सरकार के गठन के बाद नेताओं की निजी महत्वाकांक्षाए बढ़ गई और जयपुर में भी अलग अलग पावर सैंटर बना लिए। भाजपा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष के बनते ही विरोध के स्वर उभरे और उन विरोध के स्वरों ने भाजपा प्रदेश प्रवक्ता को बाहर का रास्ता दिखा दिया। यही विरोध के स्वरों का नतीजा है कि नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अपनी टीम का गठन नहीं कर पाई है। अभी हाल ही में चिडावा के सरकारी अस्पताल में एक आयोजन मे व स्यालू गांव में शहीद की मूर्ति के अनावरण समारोह में, जिसमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष भी थे, उन दोनो आयोजनों को लेकर गुटबाजी का यह आलम था कि सोशल मिडिया पर अपने समर्थकों के जरिये बहुत कुछ देखने को मिला। पिलानी विधानसभा की बात करें तो दो नेताओं की राजनीतिक अदावत किसी से छिपी हुई नहीं है और उसी का नतीजा है कि अपने समर्थकों द्वारा तीखे व्यंग्य बाण एक दूसरे धड़े पर दागे जा रहे हैं। प्रभारी मंत्री के दौरे भी इस गुटबाजी पर लगाम लगाने में नाकाम रहे हैं।
भाजपा की सरकार होने के बावजूद जिले में ऐसे कोई काम नहीं देखे गये, जिनको देखकर यह कहा जाए कि डबल इंजन की सरकार जनता के लिए समर्पण भाव से काम कर रही है। यह आम चर्चा भी है कि ज्यों ही जिला संगठन को लेकर टीम की घोषणा होगी, यह विरोध के स्वर बुलंद आवाज में सुनाई दे सकते हैं, जिसका खामियाजा आगामी नगर निकाय चुनावों में भुगतना होगा।