प्रशासन पर भारी, अवैध जमीन के कारोबारी

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद सैनी): अवैध जमीन के कारोबारियों द्वारा प्रशासन पर दबाव बनाकर खाली करवाया जा रहा है। जलंधर नाथ बांध का पानी
रक्तांचल पर्वत के पीछे स्थित जलंधर नाथ बांध में करीब पैंत्तीस साल बाद पानी की आवक हुई है। बांध के पानी से ही यहां पर कोसी गंगा का उद्गम होता था, जो करीब तीन किलोमीटर तक बहकर श्रृंगी ऋषि के आश्रम तक जाती थी, वह भी वापस शुरू हो गई है, यह कोसी गंगा करीब पैंतीस साल से लुप्त हो गई थी। यहां पर स्थित कुंड भी करीब पैंतीस साल से सूखे पड़े थे, उनमें भी इस साल पानी बहने लग गया है। जलंधर नाथ मंदिर के तन में करीब दो सौ बीघा जमीन मंदिर माफी के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। मंदिर माफी की जमीन पर अवैध जमीन कारोबारियों ने कब्जा कर लिया है, बांध की पाल के नीचे भी कुछ भू कारोबारियों ने कब्जा कर रखा है, कब्जा करने वाले लोगों ने धीरे-धीरे बांध की पाल तक कब्जा कर लिया है। मंदिर पुजारी ने बताया कि 50 फीट तक बांध की पाल को नीचे की तरफ से लोगों ने काटकर पाल के नीचे तक कब्जा कर लिया है। पाल को काटने से ही पानी का रिसाव बढा है। उन्होंने बताया कि अन्यथा रिसाव तो पहले भी होता था क्योंकि यह रेतीली भूमि है। जानकारी के अनुसार इन्हीं अवैध भू कारोबारियों की शिकायत पर बांध को खाली किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा बांध को खाली नहीं करके इन भू माफियाओं को मंदिर माफी की जमीन से हटाया जाना चाहिए। बताया जाता है कि पाल के नीचे पहले भी रिसाव होता था लेकिन पैंत्तीस साल से बारिश कम होने से अवैध जमीन के कारोबारियों ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने बताया कि धार्मिक संगठनों के सहयोग के द्वारा प्रशासन को अवगत करवाकर मंदिर माफी की जमीन को खाली करवाएंगे। क्षेत्र के लोगों के सहयोग से प्रशासन को अवगत करवाकर बांध को खाली करने के बजाय बांध की सुरक्षा की अपील करेंगे। बांध के खाली होने से कोसी गंगा के विलुप्त होने का खतरा वापस बढ़ सकता है। लोगों ने बताया कि बांध को खाली करवाने की बजाय प्रशासन को कोसी गंगा में किए गए अवैध जमीन कारोबारियों के कब्जों को हटाया जाना चाहिए। अवैध जमीन कारोबारियों के कब्जे नहीं हटाने से इनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। अवैध कब्जाधारियों पर कार्यवाही नहीं करने से प्रशासनिक छवि भी धूमिल होती जा रही है।

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