सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का घोटाला और उस पर आया हाईकोर्ट का फैसला अब कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के लिए गले की हड्डी बन गया है। कारण साफ है—भ्रष्टाचार कांग्रेस राज में हुआ जरूर, लेकिन जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी बीजेपी सरकार के कंधों पर आ गिरी है। युवाओं की नज़र अब सीधे गहलोत से हटकर भजन लाल शर्मा और वर्तमान भाजपा नेतृत्व पर टिक गई है। बीजेपी सरकार परीक्षा निरस्त करती है तो हजारों अभ्यर्थियों का समय, मेहनत और पैसा बर्बाद हो जाएगा। बेरोजगार तबके में यह संदेश जाएगा कि भाजपा भी कांग्रेस की तरह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। दूसरी ओर, अगर सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करती है, तो विपक्ष और युवा संगठन इसे “भ्रष्टाचारियों को बचाने की कोशिश” बताकर भाजपा की ईमानदारी पर सवाल उठाएँगे। यही कारण है कि यह मामला भाजपा के लिए राजनीतिक आत्मघात जैसा बनता जा रहा है। युवाओं के वोट बैंक पर भाजपा की पकड़ कमजोर पड़ने लगी है। बेरोजगार आक्रोशित हैं और कांग्रेस इस मुद्दे को नए अंदाज में भुनाने की तैयारी में है—यह कहते हुए कि भाजपा राज में भी युवाओं को न्याय नहीं मिल रहा। चुनावी नजरिए से देखें तो भाजपा का मौजूदा संकट यह है कि जिस भर्ती घोटाले को वह कांग्रेस के खिलाफ हथियार बना सकती थी, वही अब पलटकर उसके गले की फांस बन चुका है। युवा मतदाता भाजपा की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं और विपक्ष को चुनावी ऑक्सीजन मिल रही है।
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