कोटि वर्ष क्या जीवणा, अमर भये क्या होय। प्रेम भक्ति रस राम बिन, क्या दादू जोवन सोइ।।
संतप्रवर ब्रह्मऋषि श्री दादू जी महाराज कहते है कि भक्त को प्रेमा भक्ति तथा राम दर्शनों के बिना करोड़ो वर्षो के लिये भोगने को दीर्घ जीवन भी दे दिया जाये तो वह उसके लिये व्यर्थ ही है। स्वर्गीय सुख भी उसके लिए व्यर्थ ही है। कठ में नचिकेता यमराज को कह रहे है कि हे यमराज जिन भोगो का आपने वर्णन किया है वे सब क्षन भंगुर है और मनुष्यों की इन्द्रयों की शक्ति को जीर्ण कर देते है। इसके सिवाय आयु चाहे कितनी ही बड़ी क्यो न हो वह थोड़ी ही मानी जाती है।
मनुष्य को कभी भी धन से तृप्त नही किया जा सकता है और धन तो आप के दर्शनों से मिल ही जायेगा। अतः इन सबको क्या मांगना है। मेरे लिए वर तो आत्म ज्ञान ही है, इसलिये मनुष्य को आत्म ज्ञान प्राप्त करके अपना कल्याण करना चाहिए।