राजधानी जयपुर में होगा अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजन: 101 शिक्षको को मिलेगा शिक्षक गौरव अवार्ड

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): अन्तर्राष्ट्रीय समरसता मंच द्वारा भारत की प्रतिष्ठा, भारत की शक्ति, भारत के पंचशील सिद्धान्तो को वैश्विक स्तर पर बढाने के प्रयास में 192 राष्ट्रो की प्रेरणा से वसुधैव कुटुम्ब्कम्, विश्व बंधुत्व एकामहे के लिए समरसता, ग्लोबल विल्लेज पर अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की पूर्व संध्या पर शिक्षक सम्मेलन एंव विचार प्रजेंटेशन का भव्य कार्यक्रम रखा जा रहा है। मंच के बोर्ड सलाहकार सदस्य जम्बूद्दीप पदमश्री अवार्डी डॉ.विनोद कुमार शर्मा शिक्षाविद ने बताया कि 25 राष्ट्रो (भारत, नेपाल, भुटान, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, एंगोला, ऑस्ट्रिया, क्रोएटिया, फिनलैण्ड़, तुनिशियाँ, जर्मनी, ईराक, इजराईल, मैकड़ोनिया, मोरक्को, नीदरलैण्ड़, नाईजीरिया, नार्वेजियन, रोमानिया, रायल ड़ेनिश, श्रीलंका, मालदीव, किर्गिजस्तान, फिलस्तीन, फिजी) के राष्ट्र ध्वजो के सानिध्य में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। चयनित शिक्षको का शिक्षक दिवस समापन कार्यक्रम में शिक्षक गौरव अवार्ड से अभिनन्दन किया जायेगा। मंच के मुख्य सलाहकार डॉ.कुलदीप प्रसाद शर्मा एडवोकेट ने बताया की सम्पूर्ण राजस्थान से शिक्षको के नाम प्रस्तावित होकर आ रहे है। जिसमें से मंच की चयन समिति संयोजक डॉ.मदन लाल कुलपति केपीटल विश्व विद्यालय झारखण्ड द्वारा सभी प्रस्तावो पर गहनता से अध्ययन कर कमेटी को प्रतिभा सूची मे नाम सम्मिलित करने हेतु भेजा जा रहा है। आज दिनांक तक 500 से अधिक नाम प्रस्तावित होकर मंच को प्रेषित किये जा चुके है। जम्बुद्दीप पदमश्री अवार्डी श्री राजन सरदार ने बताया कि नेपाल सरकार के प्रथम उपराष्ट्रपति न्यायमूर्ति परमानन्द झा के सानिध्य में शिक्षको का अभिनन्दन किया जायेगा। स्वःपोषित वित्तिय व्यय योजना के अन्तर्गत चयनित प्रतिभाओ को नेपाल की राजधानी काठमाण्डौ में 27 से 28 दिसम्बर को 192 राष्ट्रो के सम्मेलन में आमन्त्रित किया जायेगा। कार्यक्रम में शिक्षाविदो द्वारा अपने विचारो का प्रस्तुतिकरण भी किया जाएगा। *सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य* भारत-नेपाल की वैदिक कालीन संस्कृति का पुर्न उत्थान हो, भारत पुनः वैदिक कालीन जगत गुरू के आसन पर पद् स्थापित हो, भारत को सुरक्षा परिषद् में विटो पावर के साथ स्थाई सदस्यता मिले, अयोध्या को संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय बनाया जावे। सम्मानीय शिक्षको का मुख्य द्वार पर वैदिक मंत्रोचारो द्वारा अगवानी की जावेगी।

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