चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): भगवान शिव ओघड़ दानी है। वे बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है। जो भी व्यक्ति मन, वचन, कर्म से एकनिष्ठ होकर बाबा भोलेनाथ की आराधना करता है, भगवान शिव उसे अपना बना लेते है। भगवान शिव की भक्ति के लिए मनुष्य को अभिमान का परित्याग करके शुद्ध मन से उनकी ध्यावना करनी चाहिए। उक्त उदगार कथा व्यास वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने सेहिकलां के शिवालय मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा मे तीसरे दिन व्यास पीठ से प्रवचन देते हुए प्रकट किये। कथा मे भगवान शिव की लीलाओ के साथ शिव-पार्वती विवाह का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा से पूर्व यजमान अरूण कुमार शर्मा ने सपत्निक पूजन किया। कथा मे नयनाभिराम शिव पार्वती के विवाह की सजीव झाकी एवं सुमधुर भजनों की प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय बन गया। इस अवसर पर डॉ.जगदीश प्रसाद शर्मा, श्रीचंद पूनिया, पूर्व सरपंच जगदीश बड़सरा, गजाननंद शर्मा, बिहारी लाल शर्मा, नन्दलाल स्वामी, शिवलाल शर्मा, हजारी लाल शर्मा, अशोक शर्मा, संदीप शर्मा, पवन शर्मा, बुद्धिधर कुलहरी, बाबूलाल शर्मा, राकेश पूनिया, रवि वर्मा, जितेंद्र जांगीड, संतोष सिंह शेखावत, मनोज नायक, रतिराम महरिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष मौजूद रहे।
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