जो भी संसार के चक्रव्यूह से निकलकर भगवान के शरणागत हो जाता है भगवान उसे अपना बना लेते है: पंडित तिवाड़ी

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): भगवान के लिए न तो कोई बड़ा है न ही कोई छोटा है। जो भी संसार के चक्रव्यूह से निकलकर भगवान के शरणागत हो जाता है भगवान उसे अपना बना लेते है। भगवान के यहां जाती सम्प्रदाय का भी बंधन नही है। मनुष्य को चाहिए की वह नाम जप एवं सेवा धर्म अपनाये। उक्त प्रवचन इंडाली के श्रीबूडला बालाजी मंदिर मे चल रहीं राम कथा के पांचवे दिवस शबरी प्रसंग पर बोलते हुए व्यास पीठ से वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने कहे। इस अवसर पर नवधा भक्ति की विशद विवेचना की गयी। कथा मे दशरथ मरण, भगवान राम-भरत मिलाप, सीता-हरण के प्रसंगो को भी बहुत सुंदर तरिके से सुनाया गया। इस अवसर पर सुरेश शेखावत द्वारा राम हनुमान मिलन की सुंदर सजीव झाकी व राजकुमार भगत एवं श्याम राणा के सुंदर भजनों ने वातावरण को भक्ति मय बना दिया। कथा से पूर्व पंडित सियाराम शास्त्री द्वारा यजमान जयराम शर्मा को सपत्निक पोथी व व्यास पूजन करवाया गया। कथा मे रामरतन शर्मा, राजेश देग, सुनील शर्मा, रामनाथ लाम्बा, रामकुमार मीणा, नरेश मीणा, बजरंग सिंह शेखावत, ओमप्रकाश शर्मा, माधोसिंह राजपूत, गुलझारी लाल, महिपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष शामिल हुए।

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