चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): जयपुर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर पर इलाज में गंभीर लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सूरजगढ़ के लोटिया निवासी रजनी (पति/परिजनों के अनुसार) को 9 तारीख को बच्चेदानी में गांठ के ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और गलत इलाज की वजह से महिला जिंदगी और मौत से जूझ रही है। परिजनों ने बताया कि डॉक्टरों ने पहले दूरबीन (लैप्रोस्कोपी) से ऑपरेशन करने की बात कही थी लेकिन ऑपरेशन के दौरान कोई गड़बड़ी होने पर अचानक बड़ा चीरा लगाकर टांके लगा दिए गए। इसके 2-3 दिन बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई। घर जाने के बाद जब महिला की तबीयत बिगड़ी, तो परिजन दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने पेट में पानी भरने की बात कहकर 'छोटा ऑपरेशन' करने का हवाला दिया। परिजनों का आरोप है कि पानी निकालने के नाम पर 3 से 4 बार ऑपरेशन कर दिए गए और महिला की आंत तक बाहर निकाल दी गई।
तबीयत लगातार बिगड़ने और मरीज के बोलना बंद कर देने पर डॉक्टरों ने पल्ला झाड़ते हुए उसे जयपुर रेफर कर दिया। गरीब परिवार द्वारा असमर्थता जताने पर डॉक्टरों ने जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में बात करने और पूरा खर्च उठाने का वादा किया, लेकिन वहां बेड न मिलने के कारण मरीज भर्ती नहीं हो सकी। इसके बाद मजबूरन परिजनों ने महिला को जयपुर के साकेत अस्पताल के आईसीयू (आईसीयू) में भर्ती कराया। परिजनों के मुताबिक मरीज नरेगा मजदूर परिवार से है। वे पहले ही 60-70 हजार रुपये दे चुके हैं और अब साकेत अस्पताल में रोजाना 30 से 40 हजार रुपये का खर्च आ रहा है, जिसे वहन करना उनके लिए असंभव हो रहा है। घटना से आक्रोशित परिजन और स्थानीय लोग सुबह से ही चिड़ावा के जयपुर हॉस्पिटल के बाहर धरने पर बैठे हैं। परिजनों की मांग है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ही महिला की यह हालत हुई है, इसलिए अस्पताल प्रशासन मरीज के आगे के इलाज का सारा खर्च वहन करे। उधर, इस पूरे मामले पर जब अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने 'नो कमेंट्स' कहते हुए कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन जारी है।