निवाई (लालचंद माली): सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य सुन्दर सागर महाराज संघ के वर्षायोग के अंतर्गत पड़गाहन विधि एवं निरंतराय आहारचर्या कार्यक्रम श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और दिगम्बर जैन संतों की कठिन तपस्या, त्याग एवं संयम के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया। जैन धर्म प्रचारक सुनील भाणजा एवं विमल जौंला ने बताया कि श्रद्धालु लाड़ देवी जैन, गोपाल लाल एवं शंभु कठमाणा द्वारा आचार्य सुन्दर सागर महाराज एवं आर्यिका सुलक्ष्यमति माताजी की आहारचर्या एवं पड़गाहन करवाया गया। इस अवसर पर संजू ललवाड़ी, रानी देवी, मीना कठमाणा, अविनाश कठमाणा, ऋषभ जैन, शुभम जैन, रौनक बोहरा एवं अनंत सांवलिया सहित अनेक श्रद्धालुओं को आचार्य सुन्दर सागर महाराज की आहारचर्या करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
*त्याग, तपस्या और संयम ही संत जीवन का आधार*
भारतीय संस्कृति में संतों के त्याग और तपस्या का विशेष महत्व है। आधुनिक जीवन की चकाचौंध से दूर दिगम्बर जैन संत आज भी सदियों पुरानी संयम और साधना की परंपरा का कठोरता से पालन कर रहे हैं। उनका संपूर्ण जीवन नियम, संयम और आत्मसाधना को समर्पित रहता है। संत कई-कई दिनों तक निर्जल एवं निराहार रहकर कठिन तपस्या करते हैं। दिगम्बर जैन संतों की आहारचर्या के नियम भी अत्यंत कठिन होते हैं। 24 घंटे में केवल एक बार आहार ग्रहण करना और भोजन के बाद एक बार ही जल ग्रहण करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। नियमों में जरा सी चूक होने पर उपवास करना पड़ता है। ऐसी कठिन तपस्या और अनुशासन की कल्पना करना भी सामान्य गृहस्थ के लिए मुश्किल है। संतों की आहारचर्या का उद्देश्य केवल शरीर का पोषण करना नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और आध्यात्मिक साधना के मार्ग को प्रशस्त करना है।