ऐतिहासिक यमुना जल समझौता प्रदेश की पेयजल सुरक्षा और समृद्धि का नया अध्याय बनेगा: मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास

AYUSH ANTIMA
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जयपुर/झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने कहा कि राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बने यमुना जल समझौते से प्रदेश की पेयजल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी तथा जल संसाधनों के क्षेत्र में दीर्घकालिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। यह समझौता राजस्थान के विकास की दृष्टि से गर्व का विषय है इस हेतु मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारीयों द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की साथ ही परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास सुनिश्चित किए जाने हेतु निर्देश प्रदान किये। मुख्य सचिव ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में यमुना जल हस्तांतरण परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन पर आयोजित प्रथम समीक्षा बैठक में यह बात कही। बैठक में परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से डीपीआर के विभिन्न तकनीकी एवं वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने परियोजना के अंतर्गत हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान के हिस्से के यमुना जल को भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के माध्यम से चूरू के हांसियावास तक पहुंचाने की कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने ताजेवाला हेडवर्क्स के स्थान पर विकसित हथिनीकुंड बैराज से जल हस्तांतरण व्यवस्था, पश्चिमी यमुना नहर, पाइप लाइन प्रणाली तथा प्रस्तावित 386 एमसीएम क्षमता के स्टोरेज रिजर्वायर सहित डीपीआर के प्रमुख अवयवों की विस्तार से जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि परियोजना के अंतर्गत लगभग 295 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली, 386 एमसीएम क्षमता का विशाल जलाशय तथा आधुनिक पम्पिंग एवं जल परिवहन प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे सुरक्षित एवं व्यवस्थित पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस दौरान रेणुकाजी, लखवार एवं किशाऊ बांधों की प्रगति, राजस्थान के जल हिस्से, लागत भागीदारी तथा भविष्य में उपलब्ध होने वाले अतिरिक्त जल के उपयोग पर भी विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि इतनी बड़ी जल संरचनाओं एवं रिजर्वायर के निर्माण में उत्कृष्ट इंजीनियरिंग, गुणवत्तापूर्ण निर्माण तथा दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित किया जाए। प्रस्तुतीकरण में अवगत कराया गया कि रेणुकाजी, लखवार एवं किशाऊ बांधों के पूर्ण होने के बाद राजस्थान को 201.05 एमसीएम जल वर्ष पर्यन्त उपलब्ध होगा। इससे प्रदेश के दीर्घकालिक जल संसाधन और अधिक सुदृढ़ होंगे। उन्होंने परियोजना की कार्ययोजना, चरणबद्ध टाइमलाइन, निष्पादन व्यवस्था, व्यय प्रबंधन तथा विभिन्न घटकों की लागत की समीक्षा करते हुए सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा के अनुरूप आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही भूमि अर्जन, पम्प हाउस, ग्रिड सब-स्टेशन तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचनात्मक कार्यों से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में यह भी बताया गया कि 34,102 करोड़ रूपये की संयुक्त डीपीआर केंद्रीय जल आयोग के परीक्षणाधीन है तथा परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक संस्थागत एवं प्रशासनिक तैयारियां भी निरंतर आगे बढ़ाई जा रही हैं। मुख्य सचिव ने इसके शीघ्र अनुमोदन के लिए आवश्यक समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही परियोजना के वित्तपोषण के लिए विश्व बैंक सहित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं, बैंकिंग कंसोर्टियम तथा अन्य उपयुक्त वित्तीय मॉडलों के विकल्पों पर गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में परियोजना के भविष्य के रोडमैप, भूमि अधिग्रहण, वन एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों, विशेष प्रयोजन वाहन के गठन तथा आगामी कार्यवाहियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर जल संसाधन विभाग, राज्य जल संसाधन आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार,मुख्य अभियंता भुवन भास्कर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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