गुटबाजी को हवा देती झुंझुनूं जिलाध्यक्ष

AYUSH ANTIMA
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वैसे तो झुनझुनु जिला भाजपा संगठन अनेक पावर सैंटर में बंटा हुआ है लेकिन जब से प्रदेश नेतृत्व ने जिलाध्यक्ष को मनोनीत किया है, उनकी कार्यशैली ने जिले की गुटबाजी की आग में घी का काम किया है। जिलाध्यक्ष ने संगठन को जेबी संगठन में परिवर्तित कर दिया है। जब भी कोई संगठन का आयोजन होता है तो वहीं चिर परिचित आयातित नेताओं के चेहरे मंच की शोभा बढ़ाते नजर आते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने शेखावाटी को एक ऐतिहासिक सौगात दी, इसको लेकर जयपुर में झुंझुनूं जिले के नेताओ व विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री भजन लाल का आभार व्यक्त करने के लिए जिला संगठन ने एक कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन भी जिलाध्यक्ष की हठधर्मिता के चलते गुटबाजी में तब्दील हो गया। सूत्रों की मानें तो नवलगढ़ विधायक विक्रम सिंह जाखल अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ इस अभिनंदन समारोह में पहुंचे थे लेकिन उनका नाम मंच से नहीं पुकारे जाने को लेकर विधायक विक्रम सिंह जाखल ने खुद को व अपने कार्यकर्ताओं का अपमान समझा, उनके समर्थकों द्वारा अभिनंदन समारोह पर नारेबाजी की व कुछ समर्थक कुर्सियां हाथ में लिए देखे गये। अपने इस अपमान से क्षुब्ध विधायक विक्रम सिंह जाखल ने समारोह से बाहर अपने समर्थकों को लेकर बैनर लेकर रोड के साइड में खड़े होकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करने का मानस बना लिया। हालांकि शोर शराबे में मंच से जिलाध्यक्ष द्वारा विक्रम सिंह जाखल को मंच पर उपस्थित होने का उद्बोधन सुनाई दे रहा था लेकिन विधायक विक्रम सिंह जाखल सभा स्थल से अपने समर्थकों के साथ बाहर निकल चुके थे। 
यह प्रकरण झुंझुनूं जिलाध्यक्ष की हठधर्मिता और अहंकार की पराकाष्ठा है कि एक भारतीय जनता पार्टी के चुने हुए जनप्रतिनिधि का अपमान किया गया और आयातित नेताओं को मंच पर जगह दी गई। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा मंच स्थल की तरफ आये तो खेतड़ी विधायक धर्मपाल गूर्जर व नवलगढ़ विधायक विक्रम सिंह जाखल आम कार्यकर्ता की तरह पहली पंक्ति में बैठे देखे गये। हालांकि वरिष्ठ नेताओं ने डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया। उसी का परिणाम था कि विधायक विक्रम सिंह जाखल मंच पर पहुंचे, जब मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा मंच पर पहुंचे थे।
खैर, यह भाजपा प्रदेश नेतृत्व का विशेषाधिकार है कि किस नेता को पद दिया जाए लेकिन जिलाध्यक्ष का मनोनयन विवादों में रहा है। उनके नाम की घोषणा होते ही प्रदेश के भाजपा प्रवक्ता ने सार्वजनिक तौर पर गंभीर आरोप लगाए कि जिलाध्यक्ष के मापदंडों को वर्तमान जिलाध्यक्ष पूरा नहीं करती, इसके साथ ही उन्होंने यहां तक कहा कि यह पैरासूट जिलाध्यक्ष है क्योंकि इनका नाम पैनल में भी नहीं था। हालांकि प्रदेश प्रवक्ता के इस बयान को प्रदेश नेतृत्व ने अनुशासनहीनता मानते हुए उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया लेकिन उनके आरोप आज की परिस्थितियों में सटीक बैठते हैं। यह उनकी हठधर्मिता का ही परिणाम है कि प्रदेश नेतृत्व द्वारा मंडल अध्यक्षो के नाम भाजपा के सरल एप पर चल रहे हैं लेकिन जिलाध्यक्ष उनको नियुक्ति पत्र नहीं दे रही। संगठन में जिस कार्यकर्ता को जिला मिडिया प्रभारी का दायित्व दे रखा है, उसको दरकिनार कर अनधिकृत कार्यकर्ता द्वारा समाचार पत्रों में प्रेस नोट भेजने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। जिसको लेकर अखबार समूह असमंजस में है कि आखिर जिलाध्यक्ष किस कार्यशैली से संगठन का संचालन कर रही है। संगठन में उनकी पकड़ का एक नायाब उदाहरण देखने को मिला कि अनधिकृत मिडिया के कार्यकर्ता ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस को पंडित दीनदयाल उपाध्याय बलिदान दिवस में परिवर्तित कर दिया। जिलाध्यक्ष की यह हठधर्मिता कार्यशैली से भाजपा के निष्ठावान व उसके सिध्दांतों से समर्पित कार्यकर्ताओं मे आक्रोश है और यह आक्रोश आगामी चुनावों में ज्वालामुखी का रुप न ले, इसको लेकर प्रदेश नेतृत्व को गंभीरता से सोचना होगा।

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