नोखा/बीकानेर (मुकेश रामावत): श्री बालाजी सेवा धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तहत चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर भक्ति और ज्ञान का संगम देखने को मिला। अनंत श्री विभूषित महामण्डलेश्वर आचार्य श्री बजरंग दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भागवत के प्रसंग सुनाकर धर्म और संस्कार का संदेश दिया।
महाराज श्री ने राजा परीक्षित के जन्म, जीवन की घटनाओं, श्राप और श्री शुकदेव जी के आगमन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जीवन की क्षणभंगुरता समझते ही मनुष्य ईश्वर की शरण लेता है। परीक्षित और शुकदेव का संवाद आज भी धर्म, भक्ति और वैराग्य का मार्ग दिखाता है। कथा में गौ महिमा पर विशेष प्रवचन हुआ। बजरंग दास जी ने कहा कि सनातन में गौ को केवल पशु नहीं माना जाता, बल्कि यह सृष्टि के पालन का आधार है। शास्त्रों में गौ को सर्वदेवमयी कहा गया है। गौ सेवा और संरक्षण से घर-समाज में सुख, शांति और समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि गौ सेवा सिर्फ धर्म नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मानवता को बचाने का माध्यम भी है। योग के महत्व पर बोलते हुए महाराज ने कहा कि योग तन को स्वस्थ रखने के साथ मन और आत्मा को ईश्वर से जोड़ता है। नियमित योग से जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ता है। कथा पांडाल भजनों और "जय श्रीकृष्ण", "राधे-राधे" के जयघोष से गूंजता रहा। नोखा, बीकानेर, नागौर के साथ मध्य प्रदेश, गुजरात, यूपी, हरियाणा से आए श्रद्धालु भी कथा में शामिल हुए। अंत में महाआरती कर विश्व कल्याण और गौ रक्षा की कामना की गई। आयोजन समिति के पुखराज सांखी ने बताया कि कथा प्रतिदिन बढ़ते भक्तिमय माहौल के साथ आगे बढ़ रही है।