कोटपूतली-बहरोड़ (राहुल शर्मा): पावटा कस्बे का एकमात्र राजकीय खेल ग्राउंड आज मूलभूत सुविधाओं के अभाव का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है। सेना, पुलिस और खेल भर्ती की तैयारी के लिए रोजाना सुबह-शाम सैकड़ों युवा युवती यहां पसीना बहाते हैं, लेकिन ग्राउंड में न पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही शाम के समय प्रैक्टिस के लिए लाईट।
*'पसीना बहाते हैं, पर सुविधाएं नदारद'*
स्थानीय युवा समाजिक कार्यकर्ता संजय यादव ने बताया कि हम सुबह 5 बजे से दौड़ लगाने आ जाते हैं। ग्राउंड में जगह-जगह झाड़ियां उगी हैं, ट्रैक पूरी तरह टूटा हुआ है। पीने के पानी के लिए घर से बोतल लानी पड़ती है। शाम 6 बजे के बाद अंधेरा हो जाता है, लाइट की कोई व्यवस्था नहीं। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि दर्जनों युवा टूटे-फूटे कच्चे ट्रैक पर दौड़ लगा रहे हैं। ग्राउंड में घास और झाड़ियां उगी हुई हैं। फ्लड लाइट के पोल तो लगे हैं, लेकिन वर्षों से उनमें बिजली नहीं आई।
*'कार्यक्रम के समय चमक, बाद में बदहाली'*
पूर्व वार्ड पार्षद राकेश मीणा ने कहा, "यह कस्बे का एकमात्र राजकीय खेल मैदान है। हजारों बच्चे अपना भविष्य संवारने यहां आते हैं, पर प्रशासन का ध्यान नहीं है। न शौचालय हैं, न पानी, न ही समतल ट्रैक। विडंबना देखिए, राजकीय खेल प्रोग्राम होते हैं तो इस ग्राउंड के चार चांद लग जाते हैं। अधिकारी-सफाई सब हो जाती है लेकिन कार्यक्रम खत्म होते ही ग्राउंड फिर बेहाल हो जाता है। खेल विभाग और नगरपालिका सिर्फ कागजों में योजनाएं बनाती है।"
*प्रतिभाएं हो रही हैं बर्बाद*
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ओपी बायला का कहना है कि सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। "बच्चों में जुनून है, लेकिन संसाधन नहीं। उबड़-खाबड़ ट्रैक पर दौड़ने से कई बार बच्चे चोटिल हो जाते हैं। अगर यहां सिंथेटिक ट्रैक, लाइट और पानी की व्यवस्था हो जाए तो यह क्षेत्र स्टेट और नेशनल लेवल के खिलाड़ी दे सकता है।"
*कई बार खबर छपने के बाद भी नहीं सुधरे हालात*
युवाओं और स्थानीय लोगों ने बताया कि ग्राउंड की बदहाली का मुद्दा कई बार समाचार पत्रों में प्रमुखता से उठ चुका है, लेकिन आज तक कोई ठोस सुविधा नहीं बढ़ी। ज्ञापन देने के बावजूद अधिकारी मौन हैं।
*प्रशासन से मांग*
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, खेल विभाग और नगरपालिका से मांग की है कि ग्राउंड में तत्काल पीने के पानी, शौचालय, फ्लड लाइट और ट्रैक मरम्मत की व्यवस्था कराई जाये। साथ ही ग्राउंड की नियमित सफाई और रखरखाव के लिए स्थायी कर्मचारी नियुक्त किया जाए, ताकि युवाओं का भविष्य अंधेरे में न जाये।