बाबड़ी स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु कलंगी धर सिंह सभा में गुरु अर्जन देव जी के शहीदी पर्व पर छबील का आयोजन

AYUSH ANTIMA
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पावटा (राहुल शर्मा): गुरुद्वारा श्री गुरु कलंगी धर सिंह सभा, बाबड़ी, पावटा में बुधवार को सिक्खों के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी का शहीदी पर्व 'छबील' के रूप में श्रद्धा और सेवाभाव के साथ मनाया गया। भीषण गर्मी के बीच गुरुद्वारा प्रबंधन व सिख संगत ने हाईवे पर राहगीरों के लिए निशुल्क मीठे शरबत और लंगर की व्यवस्था की।

*इतिहास को किया याद*  

सेवादार बलदेव सिंह ने बताया कि आज ही के दिन मुगलों द्वारा गुरु अर्जन देव जी को गर्म तवे पर बिठाकर ऊपर से गर्म बालू रेत डालने की अमानवीय यातना दी गई थी। गुरु साहिब ने इस असहनीय पीड़ा को भी परमात्मा की रजा मानते हुए 'तेरा किया मीठा लागे' का वचन कहा और शहीद हो गए। उनकी इसी शहादत की याद में हर साल छबील लगाकर 'सरबत दा भला' का संदेश दिया जाता है।

*छबील में उमड़ी संगत*  

गुरुद्वारे के बाहर टेंट लगाकर सेवादारों ने बड़े-बड़े ड्रमों में बर्फ डालकर गुलाबी शरबत तैयार किया। पीले जैकेट पहने सेवादारों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर सेवा की। लंबी टेबल पर लंगर का प्रसाद सजाया गया। हाईवे से गुजरने वाले ट्रक-ड्राइवर, बाइक सवार, कार चालक और स्थानीय लोगों को रोक-रोककर शरबत पिलाया गया। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि सेवादार हाथों में जग और गिलास लेकर सेवा में जुटे हैं। महिलाएं भी पूरे उत्साह से संगत की सेवा कर रही हैं। पास में रखे गुलाबी शरबत के केन और लंगर की व्यवस्था सेवाभाव को दर्शा रही है।

*शांति और भाईचारे का संदेश*  

गुरुद्वारा प्रबंधन ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी ने हमें सहनशीलता, सेवा और समर्पण का पाठ पढ़ाया। उनकी शहादत हमें सिखाती है कि हर हाल में वाहेगुरु के भाणे में रहना चाहिए। इस आयोजन का मकसद तपती गर्मी में लोगों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश फैलाना है।
कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों राहगीरों ने शरबत और लंगर छका। संगत ने 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के जयकारों से माहौल भक्तिमय कर दिया।

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